इंदौर जिले में महू के जयंत सोनी और थाईलैंड की नैन 5 दिसंबर को हिंदू रीति-रिवाज से शादी के बंधन में बंध गए। हजारों किलोमीटर दूर से थाईलैंड की नारूएपक (नैन) भारत पहुंचीं। शादी के एक हफ्ते बाद अब वापस अपने मायके थाईलैंड गई हैं। वे कुछ दिन बाद भारत लौटेंगी। हालांकि इस एक हफ्ते में वे भारतीय संस्कृति में रच-बस गई है। भाषा के कारण कम्युनिकेशन की समस्या से दो-चार जरूर होना पड़ रहा है। कारण- नैन को हिंदी नहीं आती और ससुराल के लोगों को अंग्रेजी। कई बार तो इशारों-इशारों में बातें होती हैं। टूटी-फूटी हिंदी बोलना भी खूब लुभा रहा है। दरअसल, थाईलैंड की प्राइवेट कंपनी में शुरू हुई साधारण सी मुलाकात ने दो अलग संस्कृतियों को जोड़ने की नींव रखी। साल 2015 में पहली बार मिले जयंत और नैन पहले सहकर्मी बने। समय के साथ धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई। यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। दूरी, देशों, भाषा और परंपराओं में फर्क के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे को समझा, अपनाया और आखिरी में शादी करके अपने 10 साल लंबे रिश्ते को नई पहचान दी। इंदौर की बहू बन चुकी नारूएपक (नैन) और जयंत सोनी से दैनिक भास्कर ने बातचीत की। उनकी पहली मुलाकात, 10 साल लंबे सफर और गहरे प्यार के बारे में जाना…। पढ़िए रिपोर्ट… पहले देखें वैवाहिक कार्यक्रम की चार तस्वीरें… सवाल- आप दोनों पहली बार कब और कैसे मिले?
नयन बताती हैं कि 2015 में हम थाईलैंड में एक ही कंपनी में काम करते थे। इस दौरान ही हमारी मुलाकात हुई। शुरुआत में हम सिर्फ सहकर्मी और दोस्त थे। बढ़ते समय के साथ हम एक-दूसरे को बेहतर समझने लगे और हमारी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। सवाल- आप एक-दूसरे को कैसे जान पाए?
हमने एक दूसरे के साथ थाईलैंड में एक कंपनी में साथ काम किया। वहीं से हमारी जान पहचान और दोस्ती हुई। पहले सहकर्मी थे, फिर दोस्त बने, और समय के साथ हमारा रिश्ता और मजबूत होता गया। धीरे-धीरे ये दोस्ती प्यार में बदल और गई। एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझने के बाद ही शादी का फैसला लिया। सवाल- आप दोनों के बीच बातचीत कैसे आगे बढ़ी?
नैन कहती हैं कि 2015 में पहली मुलाकात के बाद 2016 में हमारी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार के रिश्ते में रिश्ते में बदलने लगी। 2017 में जयंत ने मुझे अपनी बहन की शादी में भारत बुलाया, जहां पहली बार मैं उनके परिवार से मिली। 2019 में मैं काम के लिए बैंकॉक शिफ्ट हो गई, लेकिन दूरी के बावजूद हम एक-दूसरे के और करीब आते गए। 2024 के अंत में हमने शादी करने का फैसला किया। अब 2025 में हम अपनी शादी का जश्न मना रहे हैं। सवाल- भारत और थाईलैंड की परंपराओं में आपने क्या अंतर देखा?
जाहिर सी बात है थाईलैंड और भारत की संस्कृति में बहुत फर्क है। जैसे कि हम खाने की बात करें तो दोनों देशों के खाने में बहुत फर्क है। यहां भारत में बहुत सारे त्योहार मनाए जाते हैं, जो हमारे देश से बहुत अलग है। इन्हें जो मेरी संस्कृति के बारे में नहीं पता, उसे पूछने से हिचकते नहीं हैं। मुझे जो नहीं समझ आता, वो मैं पूछ लेती हूं। हमें कभी कोई समस्या नहीं हुई, क्योंकि हम दोनों एक-दूसरे की संस्कृति को समझते और अपनाते हैं, इसीलिए हमारे बीच में अच्छी बनतीं है। हम एक दूसरे को बेहतर समझते हैं। सवाल- ससुराल में बातचीत में भाषा की समस्या होती है?
कम्युनिकेशन में थोड़ी बहुत दिक्कत तो होती है। इशारों-इशारों में एक-दूसरे की बातों को समझ लेते हैं। मैं भी टूटी-फूटी हिंदी से अपनी बात कह देती हूं। फिर भी धीरे-धीरे समय के साथ हिंदी सीख जाएंगे। सवाल- भारत के खाने में आपको क्या पसंद है?
नैन कहती हैं मुझे यहां की सब्जी, दाल और रोटी बहुत पसंद है। लेकिन ज्यादातर मैं शौक से चावल के साथ दाल करी खाना पसंद करती हूं। इसका स्वाद मुझे बहुत सुकून देता है। सवाल- आपको जयंत की कौन-सी बात सबसे ज्यादा पसंद है? ऐसी कौन-सी कमी है जो सुधारना चाहेंगी?
नैन बताती हैं कि जयंत बहुत दयालु हैं। मेरी बहुत इज्जत करते हैं, मुझे उनके अंदर यही सबसे ज्यादा पसंद है। हम दोनों दो अलग-अलग देशों, अलग-अलग संस्कृति, सभ्यताओं के लोग हैं। इन्होंने मेरी और मेरे कल्चर की बहुत रेस्पेक्ट की है। इसलिए मैं इन्हें बहुत ज्यादा पसंद करती हूं। हमारे बीच जो भी हो, हम एक दूसरे को समझने की, समझाने की कोशिश करते हैं। किसी भी रिश्ते में कम्युनिकेशन बहुत ज्यादा जरूरी है। हमारी गहरी बातचीत और मजबूत कम्युनिकेशन ही रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत है। अगर एक बात बतानी हो जो मैं चाहूंगी कि वो सुधारें, तो वो उनकी भावनाएं ज्यादा व्यक्त न करना है। इन्हें अपनी भावनाएं जताना नहीं आता है। वो क्या फील करते हैं? उनके मन में क्या चल रहा है? वो कभी अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने देते हैं। मुझे पता चल जाता है क्योंकि मैं उन्हें अच्छे से समझती हूं, लेकिन अगर आप इनका चेहरा देखेंगे, तो नहीं समझ आएगा। वह अपनी फीलिंग अपने अंदर ही रखते हैं। मैं चाहती हूं काश, वो थोड़ी और खुलकर अपनी भावनाएं जाहिर करें, ताकि मैं उन्हें और अच्छे से समझ सकूं। सवाल- जयंत से शादी से पहले क्या आपने भारतीय संस्कृति के बारे में सीखा था या पहले से जानती थीं?
हां, शादी से पहले मैंने भारतीय संस्कृति के बारे में बहुत कुछ सीखा। मैंने भाषा भी सीखने की कोशिश की, इसलिए मैं अब कुछ बेसिक हिंदी बोल सकती हूं। अभी मै थोड़ा-थोड़ा हिंदी भी बोलना सीख गई हूं। खाने के बारे में भी जाना। भारतीय खाना भी समस्या नहीं रहा, मैं इंडियन फूड्स को एन्जॉय करती हूं। शादी से पहले मैंने त्योहारों के बारे में भी जानकारी हासिल की। दिवाली नवरात्रि जैसे मुख्य त्योहारों के बारे में जाना। मैं दिवाली जैसे फेस्टिवल में शामिल भी हुई, जिससे मुझे भारत की संस्कृति को और गहराई से समझने का मौका मिला। मुझे भारतीय परिवारों का गर्मजोशी भरा स्वभाव और एकता सबसे ज्यादा पंसद आई। सवाल- जयंत आपको नैन की कौन सी बात पसंद आती है? ऐसी कौन सी कमी है जो दूर करना चाहेंगे …
जयंत ने बताया कि नैन का बहुत पॉजिटिव और सपोर्टिव नेचर है। कई साल से वह मुझे सपोर्ट कर रही हैं। हम साथ में तो नहीं रहते थे, लेकिन ये हमेशा मुझे बिजनेस में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थी। वो खुद जॉब करती थी। मुझे बिजनेस में अच्छा करने के लिए मोटिवेट करती थीं। वो हमेशा मुझसे कहती थीं, अगर आपको किसी भी तरह की मदद की जरूरत है, तो मैं आपके साथ हूं। इनका यही सपोर्टिव नेचर अच्छा लगा। नैन की कमी दूर करने के सवाल पर जयंत ने कहा कि नैन काफी अच्छे दिल की इंसान हैं। इनके अंदर ऐसा कुछ नहीं है, जिसे बदलना चाहता हूं। यह खबर भी पढ़ें… थाईलैंड की नैन बनीं इंदौर की बहू:10 साल रिलेशन में रहे, परिवार ने भी पसंद किया थाईलैंड की युवती और महू के युवक की लव स्टोरी ने शुक्रवार को शादी के रूप में खूबसूरत अंजाम पा लिया। थाईलैंड की नारूएपक (नैन) हजारों किलोमीटर दूर से भारत पहुंचीं और महू में जयंत सोनी से हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया। पूरी खबर पढ़ें…


