रांची से दक्षिण भारत की ओर जानेवाली ट्रेनों में मंगलवार को झारखंड से हो रहे पलायन की डरावनी तस्वीरें दिखीं। रोजगार, शिक्षा और बेहतर भविष्य की तलाश में लोग 45 घंटे का जोखिम भरा सफर फर्श, शौचालय और दरवाजों के पास खड़े होकर तय करने को मजबूर दिखे। हटिया-एसएमवीटी बेंगलुरु सुपरफास्ट एक्सप्रेस की जनरल बोगियां यात्रियों से ठसाठस भरी थीं। काम की तलाश में सपरिवार जा रहे कुछ मजदूरों ने बताया कि ट्रेन में इतनी भीड़ है कि एक पैर पर खड़े होकर जाना मजबूरी है। साथ में महिलाएं और बच्चे भी हैं। बहरहाल, हटिया स्टेशन पर उमड़ी मजदूरों की भीड़ सवाल खड़ा करती है कि आखिर झारखंड के लोग अपने ही राज्य में काम और सम्मानजनक जीवन क्यों नहीं पा रहे हैं। साउथ जाने वाली ट्रेनों की स्थिति द. भारत जाने वाली ट्रेनों के फेरे बढ़ाएं डीआरएम झारखंड पैसेंजर्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव प्रेम कटारूका ने कहा कि झारखंड के विभिन्न िजलों से हजारों की संख्या में यात्री दक्षिण भारत जाते हैं। इनमें छात्र-छात्राएं, मजदूर, नौकरी पेशा लोग और मरीज शामिल होते हैं। जनवरी में खेती-बाड़ी का काम बंद होने के बाद बड़ी संख्या में यहां के मजदूर बेंगलुरू व चेन्नई जाते हैं। इस कारण यात्री गाड़ियों में दबाव काफी बढ़ जाता है और इन्हें यात्रा में कठिनाई होती है। एसोसएिशन ने डीआरएम को पत्र लिखकर दक्षिण भारत जाने वाली गाड़ियों के फेरे बढ़ाने की मांग की है। द. भारत जानेवाले यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही पलायन कर रहे मजदूर बोले- खेती-बाड़ी का समय खत्म, यहां रोजगार नहीं, इसलिए जा रहे बेंगलुरू-चेन्नई गुमला के प्रमोद ने कहा कि वह मजदूरी करने बेंगलुरु जा रहे हैं। झारखंड में इस बार खेती अच्छी नहीं हुई। घर चलाने का कोई साधन नहीं बचा। ट्रेन में सीट तो दूर, पैर रखने की जगह भी नहीं है। दरवाजे पर एक पैर टिकाकर खड़ा होना मजबूरी है। अगर अपने गांव-शहर में रोजगार िमलता तो क्यों सैकड़ों मील दूर जाते। हटिया-एसएमवीटी बेंगलुरु सुपरफास्ट के शौचाालय के पास बैठकर जाते लोग। रोहतास से अरविंद पासवान भी मजदूरी करने बेंगलुरु जा रहे हैं। कहा, मैं मिस्त्री का काम करता हूं। हटिया से बेंगलुरु की सीधी ट्रेन उनके लिए एकमात्र विकल्प है, पर हमें बैठने की जगह नहीं िमली। मजबूरी में खड़े होकर या फर्श पर सफर करना पड़ रहा है। साथ में जानेवाले लोगों की भी यही स्थिति है।


