दतिया कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। अपर कलेक्टर महेंद्र सिंह ने जनसुनवाई में उपस्थित होकर एक-एक आवेदक की बात गंभीरता से सुनी और संबंधित विभागीय अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें जमीनी विवाद, पारिवारिक कलह, अवैध कब्जा, भरण-पोषण और शासन की योजनाओं से वंचित रहने को लेकर सामने आईं। ग्राम धामना तहसील दतिया से आए आवेदकों ने बंदोबस्त पूर्व सर्वे नंबर 14 से जुड़े भूमि विवाद का मामला उठाया। आवेदकों का कहना है कि बंदोबस्त के बाद बनाए गए नए सर्वे नंबर 35 और 36 में उनके हिस्से की भूमि का रकबा कम कर दिया गया और शामिल कुआं दूसरे सर्वे में चला गया। इसके चलते उन्हें सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। साथ ही हल्का पटवारी द्वारा नक्शा सुधार में टालमटोल करने का आरोप भी लगाया गया। इंदरगढ़ तहसील से आईं वृद्ध विधवा कौशा बाई रजक ने अपने ही पुत्रों पर गंभीर आरोप लगाते हुए आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि पति के देहांत के बाद पैतृक भूमि उनके नाम न कराकर पुत्रों ने अपने नाम करा ली, उन्हें भरण-पोषण नहीं दिया जा रहा और घर से निकालने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने भरण-पोषण दिलाने, भूमि में हिस्सा देने और पूर्व में चोरी गए 50 हजार रुपये वापस दिलाने की मांग की। भांडेर तहसील के ग्राम मोवई से आए आदिवासी दंपती ने संबल कार्ड न बनने की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि परिवार में तीन मौतें होने के बावजूद संबल कार्ड के अभाव में किसी भी सरकारी सहायता का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने शीघ्र संबल कार्ड बनवाने और सहायता राशि दिलाने की मांग की। इंदरगढ़ से ही आईं 70 वर्षीय रामश्री खंगार ने अपनी वर्षों पुरानी काबिज काश्त भूमि पर दबंगों द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत की और पुलिस सहायता से कब्जा दिलाने की मांग की। वहीं ग्राम वरधुवां निवासी राहुल लोधी ने आवासीय भूमि पर अवैध कब्जा, मारपीट और सीमांकन कराने का आवेदन दिया। अपर कलेक्टर महेंद्र सिंह ने सभी मामलों में संबंधित अधिकारियों को जांच कर शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए और कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है।


