उत्तर भारत से सक्रिय शीत लहर के प्रभाव से शनिवार को बुंदेलखंड के दतिया जिले में कड़ाके की ठंड दर्ज की गई। दिन में अधिकतम तापमान 16.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम रहा, जबकि रात का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री तक गिर गया। ठंड के कारण जिले में कोल्ड डे जैसे हालात बन गए हैं। दतिया में ठंड ने बनाया रिकॉर्ड शनिवार को दतिया जिले में ठंड ने नया रिकॉर्ड बनाया। दिन का अधिकतम तापमान 16.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मध्यप्रदेश में सबसे कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार यह इस सर्दी का अब तक का सबसे ठंडा दिन माना जा रहा है। रात में भी बढ़ी कंपकंपी रात के समय न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। शिवपुरी के बाद यह प्रदेश की दूसरी सबसे सर्द रात रही, जिससे लोगों को रात में भी तेज ठिठुरन का सामना करना पड़ा। लगातार गिरते तापमान के कारण जिले में कोल्ड डे जैसे हालात बन गए हैं। दिनभर धूप कमजोर रही और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। सुबह घना कोहरा और बर्फीली हवाएं सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई। साथ ही बर्फीली हवाओं ने ठंड का असर और बढ़ा दिया। सड़कों पर वाहन चालकों को भी सावधानी बरतनी पड़ी। तेज ठंड के कारण लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर आम दिनों की तुलना में भीड़ कम नजर आई। अलाव की संख्या बढ़ी ठंड से राहत पाने के लिए सार्वजनिक स्थानों, चौराहों और बस स्टैंड पर अलाव की संख्या बढ़ा दी गई है। लोग सुबह और रात के समय अलाव का सहारा लेते दिखे। अस्पतालों में सर्दी, खांसी, जुकाम और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मकर संक्रांति तक जारी रह सकती है ठंड मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, मकर संक्रांति तक ठंड का यह दौर बना रह सकता है। इस दौरान घना कोहरा छाए रहने और दृश्यता कम रहने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि संक्रांति के बाद कोहरे में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन यदि महीने के अंत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश होती है, तो ठंड एक बार फिर लौट सकती है। खेती के लिए बढ़ी चिंता विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा हालात खेती के लिहाज से संवेदनशील हैं। तापमान सामान्य से नीचे रहने के कारण पाले की आशंका जताई जा रही है, जिससे सब्जी, आलू और दलहन फसलों को नुकसान का खतरा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि रात के समय खेतों की मेड़ों पर धुआं करें और फसलों में नमी बनाए रखें, ताकि पाले के असर से फसलों को बचाया जा सके।


