दमोह जिले की हटा विधानसभा के अंतर्गत कुम्हारी क्षेत्र में जिला पंचायत सदस्य के लिए उपचुनाव सोमवार को हो रहा है। इस दौरान पटेरा ब्लॉक के घोघरा गांव में एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जहां ग्रामीणों ने वोट डालने से साफ मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि उनके गांव में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं आज तक नहीं पहुंची हैं। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार ग्रामीण प्रशासन के प्रति अपना विरोध जताने के लिए मतदान केंद्र नहीं पहुंचे। कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को मनाया जैसे ही मतदान बहिष्कार की खबर जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर सुधीर कोचर तक पहुंची, वे तुरंत घोघरा गांव के लिए रवाना हुए। कलेक्टर ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों का जल्द निराकरण किया जाएगा। प्रशासन की ओर से मिले इस ठोस आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और दोपहर करीब डेढ़ बजे से गांव में फिर से मतदान की प्रक्रिया शुरू हो सकी। जर्जर सड़क और बुनियादी सुविधाओं की समस्या घोघरा गांव के लोगों का कहना है कि सड़क न होने के कारण उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर होती है। खराब रास्तों की वजह से गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को अस्पताल ले जाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इसके अलावा गांव में बिजली और पानी की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। इन्हीं समस्याओं से परेशान होकर ग्रामीणों ने इस बार उपचुनाव में वोट न देने का कड़ा फैसला लिया था। 31 दिसंबर को गांव में लगेगा विशेष समस्या निवारण शिविर कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि 31 दिसंबर को गांव में सभी सरकारी विभागों के अधिकारियों के साथ एक विशेष शिविर लगाया जाएगा। इस शिविर के माध्यम से गांव की हर समस्या का समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि गांव की सड़क के निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कलेक्टर ने ग्रामीणों से अपील की कि वे लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा लें और प्रशासन पर भरोसा रखें। आश्वासन के बाद गांव में बढ़ा मतदान का प्रतिशत कलेक्टर के समझाने के बाद ग्रामीण भारी संख्या में मतदान केंद्र पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिला प्रशासन के दखल के बाद कुम्हारी क्षेत्र में मतदान की गति में तेजी आई और शाम तक यहां 50 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीणों ने इस उम्मीद के साथ वोट डाले कि नए साल में उनके गांव की तस्वीर बदलेगी और उन्हें बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।


