दरगाह में 814वें उर्स के बड़े कुल की रस्म हुई:केवड़े व गुलाब जल से की धुलाई, बुलंद दरवाजे से उतारा गया झंडा

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स के बड़े कुल की रस्म मंगलवार को हुई। इसके साथ ही 17 दिसंबर से चल रहे उर्स का विधिवत समापन हुआ। इधर, बुलंद दरवाजे पर चढ़ा उर्स का झंडा भी उतार लिया गया। उर्स के समापन के बाद जायरीनों के लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। इधर, सोमवार रात से ही अकीदतमंद कुल के छींटे देना शुरू कर दिया था। अंजुमन सैयदजादगान के उर्स कन्वीनर सैयद हसन हाशमी ने बताया- सुबह से गरीब नवाज की मजार की खुद्दाम ए ख्वाजा के केवड़े व गुलाब जल से धुलाई की गई। पूरे मजार शरीफ की धुलाई की गई। साल में एक बार ही यह रस्म अदा की जाती है। अस्ताना में मौजूद खुदाम ए ख्वाजा दरगाह में मौजूद जायरीनों व देशवासियों के लिए इस मौके पर दुआ की गई। इधर, रात से ही कई जायरीनों ने आस्ताना के दरो दीवार की गुलाब जल केवड़े से धुलाई शुरू कर दी थी। इधर, दरगाह के बुलंद दरवाजे पर भीलवाड़ा के गौरी परिवार द्वारा 17 दिसंबर को 814वें उर्स का झंडा चढ़ाया गया था। यह झंडा तब से ही बुलंद दरवाजे पर चढ़ा था। मंगलवार को असर की नमाज के बाद उसे पारंपरिक तरीके से उतारा गया। फोटो-वीडियो- नजीर कादरी

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