भास्कर न्यूज | अमृतसर पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ वीजा और कूटनीतिक संबंधों पर सख्ती बढ़ा दी है। इसी के तहत अटारी -वाघा बॉर्डर को वीरवार को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इस दौरान बॉर्डर से किसी भी देश का कोई नागरिक आर-पार नहीं हुआ। हालांकि कुछ हिन्दू परिवार जो हरिद्वार में अस्थि विसर्जन करने आए थे उन्हें भी जाने नहीं दिया गया। पाकिस्तान द्वारा भारत में फैलाए आतंक का खमियाजा खुद पाकिस्तान को भी भुगतना पड़ रहा है। अटारी-वाघा सीमा पर आज पाकिस्तान में ब्याही दो सगी बहनों सहित डपोर्ट िकए 15 पाकिस्तानी गेट न खोल जाने के कारण बॉर्डर पर फंस गए हैं । वहीं सरहद पार पाक लौटने के लिए दोनों सगी बहने आंसू बहाती रहीं, रोती-चिल्लाती रहीं। पाक सरहद वाघा सीमा के द्वार खोलने के लिए पाकिस्तान सरकार के समक्ष जीरो लाइन पर गिड़गिड़ाती रहीं, उनकी मिन्नतें करती रहीं, लेकिन पाक सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा। दोनों मुल्कों की वापसी की समयावधि 30 अप्रैल को समाप्त हो जाने के चलते पाक ने इन सगी बहनों को लेने से आज साफ इंकार कर दिया है। दोनों बहनों की शादी पाकिस्तान के बाशिंदों से हुई थी। दोनों भारत में अपनी बीमार मां को मिलने के लिए 45 दिन के वीजे पर आई थीं। लेकिन पहलगाम में हुई आतंकी घटना के नतीजन दोनों मुल्कों में पैदा हुए खटास व संबंधों के बिगड़ने के चलते उन्हें आज पाकिस्तान लौटने की इजाजत नहीं हासिल हुई। नबीला राज व शरमीन इरफान ने बताया कि बच्चों के पासपोर्ट पाकिस्तानी हैं जबकि बच्चों की इन माताओं के पासपोर्ट भारतीय हैं जिसके चलते भी इन्हें वापसी की इजाजत नहीं मिली। दोनों बहनों नबीला व शरमीन ने आज पाक सरकार के समक्ष हाथ जोड़कर वापिसी की काफी मिन्नतें की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि असल में उन्हें नहीं मालूम था कि पाकिस्तान लौटने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल थी। उन्होंने कहा कि वे आज सुबह से ही वापिस लौटने के लिए अटारी सीमा पहुंच गई थीं, लेकिन वापिस लौटने की इजाजत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के बच्चे पाकिस्तान में हैं तथा उनकी माताएं भारत में हैं जबकि कुछ लोगों के बच्चे भारत में हैं जबकि उनकी माताएं पाकिस्तान में हैं। सरकारों को इन बच्चों प्रति एक बार फिर से सोचना चाहिए तथा इसकी अवधि में बढ़ौत्तरी करनी चाहिए। बहनों के एकलौते भाई मोहम्मद शरीक ने बताया कि एक की शादी को 18 साल हो गए हैं जबकि दूसरी बहन की शादी को 12 साल हो चुके हैं। शरीक ने बताया कि दोनों बहनों के बच्चे पाकिस्तान में ही हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें पाकिस्तान जाना पड़ रहा है लेकिन भारतीय पासपोर्ट होने के चलते उन्हें पाकिस्तान जाने की इजाजत नहीं दी गई । सात दिनों में 1617 भारतीय आए। कुछ पाकिस्तानी नागरिक हवाई मार्ग से भी देश छोड़कर गए होंगे, लेकिन चूंकि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी उड़ानें नहीं चलतीं, इसलिए वे किसी तीसरे देश के रास्ते लौटे होंगे।


