भास्कर न्यूज | जालंधर श्री कष्ट निवारण बालाजी सेवा परिवार की ओर से साईं दास स्कूल ग्राउंड पटेल चौक में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भक्त कथा सुनकर मंत्रमुग्ध हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रबंधकों ने विधिवत पूजन करके की। पूजन के बाद कथा वाचक जया किशोरी ने भक्तजनों को बताया कि भगवान के दर्शन आस्था, भक्ति और विश्वास से प्राप्त किए जा सकते हैं। आस्था का स्थान आपका हृदय है, जिसे आप खुद ही बनाते हैं। आपकी पांचों इंद्रियों से जाने वाला कुछ भी आपकी आस्था को नहीं छू सकता क्योंकि इंद्रियों की पहुंच दिल तक नहीं है। आस्था हृदय की बुद्धिमत्ता है, जबकि विश्वास मन की। कोई भी व्यक्ति अपनी आस्था, भक्ति और मेधा के साथ भगवान के दर्शन प्राप्त कर सकता है। यह आत्मा की स्पर्श और आध्यात्मिक अनुभव के रूप में आ सकता है। ईश्वरीय आस्था से मन को जो शांति मिलती है, उससे जीवन के तनाव कम होते हैं। आस्था रखने से व्यक्ति में सदाचरण करने और लोक कल्याण के काम करने की भावना आती है। अगर यह कहा जाए कि भगवान में अगर आस्था है तो उलझनों में भी रास्ता है तो कोई भी गलत बात नहीं होगी। प्रभु दर्शन के लिए पूजा-पाठ से ज्यादा मन की श्रद्धा का होना जरूरी है। आस्था और विश्वास के साथ यदि हम सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करें तो भगवान अपने भक्त से मिलने के लिए दौड़े चले आते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर में आस्था रखने वाले लोग सभी प्रकार की परेशानियों से महफूज रहते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो भगवान में आस्था रखते हैं लेकिन मुसीबत आने पर विचलित हो जाते हैं परेशानी की स्थिति में कुछ लोग अपनी आस्था को कमजोर करके ईश्वर को ही जिम्मेदार ठहराते हैं जबकि ईश्वर कभी किसी के साथ बुरा नहीं करते। उन्होंने भक्तों कहा कि भक्त एवं ईश्वर के बीच एक विश्वास की डोर होती है। इस डोर को मजबूत बनाए रहना बेहद जरूरी है, यदि ऐसा नहीं हुआ तो ईश्वर में हमारी श्रद्धा कम होती चली जाती है और हमारा जीवन दु:खमय बन जाता है। ईश्वरीय विश्वास यह नहीं होता कि प्रभु हमारे सभी काम पूरे करेगा, बल्कि विश्वास तो यह होता है कि ईश्वर हमारे लिए जो भी करेगा अच्छा ही करेगा। कथा दौरान जय किशोरी ने ‘कौन कहता है भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं’, ‘राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी’, ‘चलो रे मन श्री वृन्दावन धाम जपेंगे राधे-राधे नाम’ भजन सुनाकर मंत्रमुग्ध किया।


