इम्प्लांट लगाना ही पर्याप्त नहीं है, इसकी देखभाल करना सबसे जरूरी होता है। अधिकतर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते, जिसके कारण थोड़े ही समय में नई समस्याएं सामने आ जाती हैं। दांतों के साथ-साथ इम्प्लांट की भी नियमित देखभाल आवश्यक है। इसके लिए दिन में दो बार ब्रश करना चाहिए, सॉफ्ट ब्रश का इस्तेमाल करें और कम से कम दो–तीन मिनट तक ब्रश करें। हर छह महीने में दांतों और इम्प्लांट की जांच कराना भी जरूरी है। नई तकनीक के तहत मशीन गाइड स्कैन से ही बीमारी और उपचार की जानकारी मिल जाती है, जिससे डॉक्टर्स और मरीज दोनों को फायदा हो रहा है। यह बात इंडियन डेंटल एसोसिएशन (IDA) मध्य प्रदेश की कॉन्फ्रेंस में बेंगलुरु से आए डॉ. अनिरबन चटर्जी ने कही। कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से आए डॉक्टर्स ने दांतों की आधुनिक तकनीक पर चर्चा की। लगभग 2 हजार रिसर्च पेपर भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट रहे। उन्होंने कहा कि हर मरीज को सस्ता और बेहतर उपचार मिले, इसके लिए डॉक्टर्स से चर्चा की। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण दंत चिकित्सा उपलब्ध कराने की बात कही। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सुमित जैन ने बताया कि शनिवार को डिजिटल डेंटिस्ट्री, थ्रीडी इमेजिंग, इम्प्लांटोलॉजी, लेजर तकनीक, क्लियर अलाइनर उपचार, एंडोडॉन्टिक्स, पीडियाट्रिक और कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री सहित अन्य विषयों पर चर्चा हुई। वैज्ञानिक अध्यक्ष डॉ. मधुर नवलानी ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने तकनीक पर विस्तृत चर्चा की और स्टूडेंट्स को भी बारीकियों से अवगत कराया। डॉ. अमित रावत ने कहा कि कॉन्फ्रेंस के माध्यम से निजी और सरकारी अस्पतालों में दांतों के बेहतर उपचार को लेकर विचार-विमर्श हुआ और सभी सदस्यों ने इसे लेकर सहमति जताई। कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि, सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि मैंने 1980 में दंत चिकित्सा महाविद्यालय से पढ़ाई की है। सांसद होने के साथ-साथ मैं डेंटल सर्जन भी हूं। उन्होंने बताया कि दंत चिकित्सा में भारत अब बहुत आगे निकल चुका है और विदेशों से मरीज इलाज के लिए भारत आ रहे हैं। एक तरह से भारत डेंटल टूरिज्म हब बन चुका है, जिसमें इंदौर भी अग्रणी है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दंत चिकित्सा सेवाओं को बढ़ाया जाए, क्योंकि कई डॉक्टर अब तक वहां काम करने के इच्छुक नहीं थे।


