लव कुमार दूबे | गढ़वा छतरपुर पंचायत में शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की आबादी 50-50 प्रतिशत है। चार गांव में से पिपरा खुर्द व विशुनपुर गांव में पंचायत की 50 प्रतिशत आबादी निवास करती है। दोनों गांव का शहरीकरण हो गया है। बावजूद मूलभूत सुविधा नाली, गली व पेयजलापूर्ति योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं सिंचाई के लिए किसान दानरो नदी व कुआं पर आश्रित हैं। पंचायत के छतरपुर के 60 प्रतिशत व झलुआ गांव के 10 प्रतिशत लोग रोजगार के लिए अन्यत्र पलायन करते हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार के लिए साधन नहीं है। मजदूर गुजरात, मध्य प्रदेश, मुंबई आदि जगहों पर काम करने के लिए जाते हैं। छतरपुर पंचायत के बिंद टोला, चंद्रवंशी टोला में मूलभूत सुविधा का आज भी अभाव है। हालांकि पंचायत के सभी गांवों में सड़कों का निर्माण किया गया है। विशुनपुर गांव में बिजली विभाग, सिंचाई विभाग और पिपरा खुर्द में सर्किट हाउस व पुलिस लाइन स्थित है। बावजूद विशुनपुर व पिपरा खुर्द नगर परिषद क्षेत्र से बाहर है। पंचायत में उच्च विद्यालय व स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत लगाई गई 50 जलमीनार में से अधिकांश खराब हैं। सभी घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। नल जल योजना प्रभावी नहीं है। विशुनपुर व पिपरा खुर्द गांव को नगर परिषद में होना चाहिए : ग्रामीण विशुनपुर के ग्रामीण दिनेश तिवारी, मनीष कमलापुरी, सोनू कुमार, अरविंद कुमार, रूढ़ल पांडेय आदि ने कहा कि विशुनपुर व पिपरा खुर्द गांव शहर के समीप है। कई सरकारी विभाग का कार्यालय इन गांवों में स्थित है। बावजूद शहर में शामिल नहीं होना दुर्भाग्य है। जबकि छतरपुर गांव निवासी कमलेश भुइयां, फुलवा देवी, भोला शंकर, कविता देवी आदि ने कहा कि जल मीनार लगाया गया है। मगर कुछ का मोटर खराब हो चुका है। कुछ जगहों पर बिछाए गए पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी घरों तक नहीं पहुंच पा रहा है। फंड के अभाव में नाली और गली का निर्माण बाधित : मुखिया छतरपुर पंचायत की मुखिया सुनीता देवी ने कहा कि डेढ़ वर्ष से फंड का अभाव है। जिससे विशुनपुर व पिपरा खुर्द में नाली व गली का निर्माण कार्य बाधित हैं। वहीं चापानल की मरम्मति में भी परेशानी होती है। हालांकि पंचायत में सभी जगहों पर सड़कों की जाल बिछाया गया है। गरीबों को आवास, राशन, पेंशन की सुविधा मुहैया कराई गई है। पंचायत में उच्च विद्यालय नहीं है।


