छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नगर निगम को दान में मिली करोड़ों रुपए कीमती जमीन पर देखरेख के अभाव में अवैध कब्जा कर लिया गया है। नगर निगम प्रशासन के अफसर सालों तक इस जमीन को कब्जा मुक्त कराने का प्रयास करने का दावा करता रहा। लेकिन, अब तक इसे अपने कब्जे में नहीं ले सका है। एक बार फिर नगर निगम ने जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए सीमांकन की प्रक्रिया शुरू की है। बता दें कि साल 1943 में पंडित देवकीनंदन दीक्षित ने सीपत के पास ग्राम कारीछापर की 76 एकड़ 87 डिसमिल जमीन को तत्कालीन नगर पालिका को दान में दी थी। पहले इस भूमि का हर 3 वर्ष में नगर निगम द्वारा धान की खेती करने के लिए इश्तहार प्रकाशन किया जाता था, जिसके बाद गांव में ही अमानत राशि जमा कराकर आम नीलामी की जाती थी। लेकिन, बाद में नगर निगम के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान देना बंद कर दिया। नतीजा ये हुआ कि करीब 77 एकड़ जमीन के अधिकांश हिस्सों में ग्रामीणों ने कब्जा कर लिया। कुछ लोगों ने यहां मकान भी बना लिए हैं तो कुछ लोगों ने कब्जा कर दूसरों को जमीन बेंच दी है। अफसरों की उदासीनता, कब्जा मुक्त कराने चार साल पहले हुआ था सीमांकन
बताया जा रहा है कि निगम प्रशासन ने 107 खसरों में दर्ज इस जमीन का सीमांकन शुरू कराया है। अब तक 33 खसरों की नापजोख पूरी हो चुकी है, जबकि शेष खसरों के सीमांकन में अभी करीब पांच दिन और लगने की संभावना है। सीमांकन कार्य के लिए एक राजस्व निरीक्षक, सात हल्का पटवारी, नगर निगम के पटवारी, इंजीनियर और पेट्रोलिंग टीम को तैनात किया गया है। बता दें कि चार साल पहले भी निगम प्रशासन ने जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए सीमांकन कराया था। इसके बाद भी निगम इसे अपने कब्जे में नहीं ले सका। सीमांकन के बाद चलेगा बुलडोजर
बताया जा रहा है कि 30 एकड़ से अधिक भूमि पर ग्रामीणों द्वारा अवैध रूप से मकान बनाकर कब्जा कर लिया गया है। इस दौरान कई आयुक्त बदले, लेकिन आज तक पंडित देवकीनंदन दीक्षित ट्रस्ट की यह दान भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी। अब प्रशासन सीमांकन के जरिए जमीन की स्पष्ट पहचान कर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। अफसरों का दावा है कि जमीन का सीमांकन कराने के बाद अवैध कब्जाधारियों को नोटिस देकर बुलडोजर चलाकर इसे खाली कराया जाएगा।


