दावा है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, लेकिन हकीकत ये…:260 प्राइमरी-मिडिल में शिक्षक नहीं, 7127 स्कूलों में सिर्फ एक, चाहिए 60 बच्चों पर दो

प्रदेश में स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के विरोध के बीच सरकार ने दावा किया है कि यह नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार हो रहा है। इससे स्कूलें बंद नहीं होंगी, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी। शिक्षकों का समान उपयोग हो सकेगा। प्रदेश में 30 हजार 700 सरकारी प्राथमिक शालाएं हैं। इनमें छात्र-शिक्षक अनुपात 21.84 है। वहीं 13 हजार 149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में यह अनुपात 26.2 है। यह राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। फिर भी कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। प्रदेश की 212 प्राथमिक शालाएं पूर्णतः शिक्षकविहीन हैं। 6872 प्राइमरी स्कूल एकल शिक्षकीय हैं। 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं शिक्षकविहीन हैं। 255 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। इस तरह 260 प्राइमरी-मिडिल स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 7127 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार प्राथमिक शालाओं में 60 छात्रों तक 2 सहायक शिक्षक और प्रत्येक 30 अतिरिक्त छात्रों पर एक अतिरिक्त सहायक शिक्षक रखने का प्रावधान है। मिडिल स्कूलों में 105 छात्रों तक 3 शिक्षक व 1 प्रधान पाठक और 35 छात्रों पर एक अतिरिक्त शिक्षक हो। वर्ष 2008 के बाद शुरू हुए स्कूलों में प्रधानपाठक का पद स्वीकृत नहीं है। प्रदेश में 1762 शिक्षक ही अतिशेष, जबकि जरूरत 5536 की प्राइमरी स्कूलों में 77 हजार 845 सहायक शिक्षक हैं। मिडिल स्कूलों में 55 हजार 692 शिक्षक कार्यरत हैं। यदि शिक्षक विहीन प्राथमिक शालाओं में 2-2 और एकल शिक्षकीय शालाओं में 1-1 अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति की जाए तो 7 हजार 296 सहायक शिक्षक लगेंगे, जबकि उपलब्ध अतिशेष सहायक शिक्षक केवल 3608 हैं। पूर्व माध्यमिक स्तर पर शिक्षकविहीन शालाओं में 4, एकल शिक्षकीय में 3, दो शिक्षकीय में 2 और तीन शिक्षकीय में 1 अतिरिक्त शिक्षक की आवश्यकता होगी। तब 5536 शिक्षक लगेंगे, जबकि केवल 1762 शिक्षक ही अतिशेष हैं। नई व्यवस्था से संतुलन का दावा
शिक्षकों की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद उनका वितरण असमान है। कुछ स्कूलों में जहां शिक्षक नहीं हैं, वहीं अन्य स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक है। करीब 1500 प्राथमिक शालाएं ऐसी हैं, जहां 5 या उससे अधिक शिक्षक हैं। 3465 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 5 शिक्षक और 1700 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 5 से अधिक शिक्षक हैं। इस असंतुलन को युक्तियुक्तकरण से सुधारा जा सकता है। उच्च माध्यमिक व हाई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति विषयवार सेटअप के अनुसार होती है। स्कूल बंद नहीं होंगे, समायोजन होगा
युक्तियुक्तकरण किसी भी स्कूल को बंद करने की प्रक्रिया नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रस्तावित क्लस्टर विद्यालय अवधारणा के अनुरूप एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। केवल प्रशासनिक समन्वय होगा, न कि किसी विद्यालय या पद की समाप्ति। यदि किसी परिसर में तीनों स्तर के विद्यालय हैं, तो प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों का समायोजन उच्चतर विद्यालय परिसर में किया जाएगा। ये खासियतें बता रहे- खर्च घटेगा, बार-बार नहीं लेना होगा प्रवेश, ड्रॉपआउट घटेगा {शिक्षकविहीन एवं एकल शिक्षकीय विद्यालयों में अतिशेष शिक्षकों की तैनाती। {अतिरिक्त शिक्षक की बढ़ेगी उपलब्धता। {स्थापना व्यय में आएगी कमी। {एक परिसर में पढ़ाई से बच्चों के ड्रॉपआउट में कमी। {89 प्रतिशत बच्चों को तीन बार प्रवेश लेने की आवश्यकता नहीं। { छात्र ठहराव दर में वृद्धि। {मजबूत अधोसंरचना प्रदान करने सुगमता। {शालाओं की कार्यप्रणाली में होगा सुधार।

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