मारवाड़ की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले मिर्धा परिवार से दुखद खबर है। दिग्गज किसान नेता और ‘बाबा’ के नाम से विख्यात स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा के पुत्र एवं नागौर के पूर्व सांसद भानु प्रकाश मिर्धा का आज (गुरुवार) सुबह निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे। नागौर में पहली बार ‘कमल’ खिलाने वाले भानुप्रकाश की देह का अंतिम संस्कार कल, 2 जनवरी को जोधपुर में किया जाएगा। पिछले कुछ समय से थे अस्वस्थ उनके पुत्र मनीष मिर्धा के अनुसार, भानु प्रकाश मिर्धा ने गुरुवार सुबह करीब 10:45 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों और किसान समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। कल दोपहर 1 बजे अंतिम संस्कार स्व. भानु प्रकाश मिर्धा की पार्थिव देह को अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया है। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार (2 जनवरी) को दोपहर 1 बजे जोधपुर में चौपासनी रोड पर स्थित मिर्धा फार्म पर किया जाएगा। अंतिम यात्रा में परिवारजन, मित्रगण और बड़ी संख्या में समर्थकों के शामिल होने की उम्मीद है। राजनीतिक सफर: चाचा को हराकर नागौर में पहली बार खिलाया ‘कमल’ भानु प्रकाश मिर्धा का जन्म 27 मार्च 1953 को हुआ था। वे 11वीं लोकसभा के सदस्य रहे। वरिष्ठ किसान नेता नाथूराम मिर्धा के छोटे बेटे थे और पारिवारिक राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। वर्ष 1996 में अपने पिता नाथूराम मिर्धा के निधन के बाद खाली हुई नागौर सीट पर वर्ष 1997 में हुए उपचुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने अपने ही चाचा और कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। जिससे उस समय प्रदेश की राजनीति में बड़ी चर्चा हुई थी। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक रहे मिर्धा पेशे से कृषक थे और संसदीय कार्यकाल के बाद भी सार्वजनिक जीवन में जुड़े रहे। वे मूल रूप से नागौर के रहने वाले थे और लंबे समय तक किसान व ग्रामीण हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय राजनीति में रहे। हालांकि, बाद के वर्षों में वे सक्रिय राजनीति से थोड़ा दूर हो गए थे। मिर्धा परिवार किसान आंदोलन, सहकारी आंदोलन और ग्रामीण राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है, जिसमें भानु प्रकाश मिर्धा को सादगी और सहज व्यवहार के लिए जाना जाता था। श्रीगंगानगर से गहरा नाता भानु प्रकाश मिर्धा का श्रीगंगानगर के प्रतिष्ठित सहारण परिवार से भी गहरा रिश्ता था। वे समाजसेवी व किसान नेता कृष्ण सहारण ‘मदेरां’, महेंद्र सहारण और साहबराम सहारण के बहनोई थे। उनके निधन पर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ क्षेत्र के किसान नेताओं ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है।


