दिग्विजय बोले,बीजेपी-आरएसएस हिंदुओं और ओवैसी मुलसमानों को डराते हैं:पूर्व सीएम ने कहा- सावरकर और जिन्ना ने देश का बंटवारा कराया अब मोहल्ले बंट रहे

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा हिंदू धर्म के साथ नहीं, बल्कि हिंदुत्व के साथ खड़ी है।
दिग्विजय सिंह ने कहा-“हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है, यह केवल एक पहचान है। भाजपा लोगों को मूर्ख बनाने का काम कर रही है।” बीजेपी हिंदू धर्म के साथ नहीं, हिंदुत्व के साथ दिग्विजय सिंह ने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर कर कहा – भाजपा हिंदू धर्म के साथ नहीं हैं हिंदुत्व के साथ है। हिंदुत्व धर्म नहीं हैं ये पहचान है, उन्होंने जो कहा है लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। जगह-जगह हिंदू सम्मेलन हो रहे हैं। हम से ही चंदा ले रहे हैं और हमको ही भंडारा खिला रहे हैं। ये कौन सा धर्म है। बीजेपी-आरएसएस हिंदुओं और ओवैसी मुसलमानों को डराते हैं दिग्विजय सिंह ने कहा- भाजपा और आरएसएस इनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। ये केवल लोगों को डराते हैं हिंदुओं एक हो जाओ, हिंदू धर्म खतरे में हैं और ओवैसी कहते हैं मुसलमानों एक हो जाओ हिंदुओं से खतरा है। दोनों मिलकर खेल खेलते हैं। न हिंदुओं को खतरा है न मुसलमानों को खतरा है। सावरकर और जिन्ना ने देश का बंटवारा कराया, अब मोहल्लों के बंटवारे हो रहे
पूर्व सीएम ने आगे कहा- आपस की लड़ाई के कारण देश को खतरा है। इस बात को समझो देश को बचाओ। सावरकर जी ने और मुहम्म्द अली जिन्ना जी ने देश का बंटवारा करा दिया एक बार…. अब देश का बंटवारा नहीं, यहां मोहल्लों का बंटवारा हो रहा है। शहरों में बंटवारा हो रहा है। कई जगह ऐसी हो गई हैं कि मुसलमानों ने अपना मोहल्ला बना लिया हिन्दुओं ने अपना मोहल्ला बना लिया। ये बंटवारा क्यों हो रहा है? हम सब एक हैं सबका मालिक एक है। हम लोग भारतीय हैं भारत वर्ष हमारे संविधान में दिया हुआ हमारे देश का नाम है। हिंदू शब्द वैदिक नहीं, फारसी है दिग्विजय सिंह ने कहा- हिंदू शब्द कहां से आया है ये वैदिक शब्द नहीं हैं। ये फारसी शब्द है। जब भारसी भाषा यहां आई तो फारसी लोग स को ह कहते हैं तो सिंध नदी के इस पार जो लोग रहते थे वो लोग हिंदू कहलाने लगे।
इसलिए मोहन भागवत ठीक कहते हैं हिंदू-मुसलमान, हिंदू-ईसाई, हिंदू-सिख…. बात वही है कि हिंदू धर्म नहीं है, ये एक भौगोलिक शब्द है। हमारा धर्म सनातन है। जिसका अंत नहीं वो सनातन
दिग्विजय सिंह ने कहा- सनातन का मतलब क्या होता है जिसका कोई अंत नहीं वो सनातन है। सनातन धर्म में हजारों वर्ष से इस बारे में विवाद हुआ चर्चा हुई उसका निचोड़ सनानत धर्म में यही है अद्वैत वेदांत।
इसमें आदि शंकराचार्य ने दो हजार साल पहले हमारे चार मठ स्थापित किए। इसका मतलब ये है कि नर ही नारायण है मुझे कहीं जाने की जरूरत नहीं हैं। यहां हृदय में नारायण है इन्हें सनातन की परिभाषा कौन समझाए? हमारी आस्था का प्रतीक मणिकर्णिका घाट तोड़ा
दिग्विजय ने कहा- ये हिंदुत्व के साथी हैं सनातन धर्म के साथी नहीं हैं। अगर होते तो परंपरागत हजारों वर्ष से एक आस्था का प्रश्न है कि मणिकर्णिका घाट पर हमारा दाह संस्कार होगा तो हमें मोक्ष मिलेगा। ये हमारी आस्था का प्रश्न है कि हमारी अस्थियां मणिकर्णिका घाट पर गंगा जी में प्रवाहित हो तो मोक्ष मिलेगा। उस मणिकर्णिका घाट को तोड़ दिया। हमारे लिए तो ये और दुख की बात है कि मां अहिल्या जिन्होंने सनातन धर्म के लिए हर तरह से काम किया। काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। उनकी प्रतिमा तोड़ दी और उनका महल तोड़ दिया। ये क्या हमारा सनातन धर्म है? ये नरेन्द्र मोदी और मोहन भागवत से प्रश्न करता हूं कि आप जो काम कर रहे हैं वो सनातन धर्म के विरोध में काम कर रहे हैं। हिंदुत्व का शब्द सावरकर जी ने दिया उन्होंने कहा था ये धर्म नहीं हैं ये पहचान है।

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