बुधवार को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने ग्राहकों और निवेशकों दोनों को चौंका दिया। बाजार खुलते ही चांदी और सोना रिकॉर्ड स्तरों की ओर भागते नजर आए, लेकिन कुछ ही घंटों में दोनों धातुएं तेज उतार-चढ़ाव के बाद नीचे की ओर फिसल गईं। दिनभर की इस उठा-पटक ने न केवल बाजार में असमंजस बढ़ाया, बल्कि खरीदारी और निवेश के फैसलों को भी फिलहाल होल्ड मोड में डाल दिया। बुधवार सुबह चांदी आरटीजीएस में अपने अब तक के उच्चतम स्तर 3,31,850 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। शुरुआती तेजी देखकर बाजार में हलचल तेज हो गई, लेकिन यह उछाल ज्यादा देर टिक नहीं सका। दो-तीन घंटे के भीतर ही चांदी फिसलकर 3,20,071 रुपए पर आ गई। हाजिर बाजार में भी यही ट्रेंड देखने को मिला, यहां चांदी 3,27,680 रुपए के उच्च स्तर को छूने के बाद धीरे-धीरे नीचे आई और रात करीब आठ बजे तक 3,25,800 रुपए प्रति किलो पर स्थिर रही। बुधवार को बाजार खुलते ही सोना आरटीजीएस में प्रति दस ग्राम 1,60,690 रुपए तक पहुंच गया। कुछ ही समय बाद मुनाफावसूली हावी हुई और सोना नीचे फिसलकर 1,55,490 रुपए तक आ गया। हाजिर बाजार में सोने की उच्चतम कीमत 1,60,990 रुपए और निचला स्तर 1,55,760 रुपए प्रति दस ग्राम दर्ज किया गया। एक दिन, कई भाव, बाजार क्यों नहीं थम रहा
बाजार सूत्रों के अनुसार बीते एक महीने में सोना-चांदी न्यू प्राइस जोन तलाशने की कोशिश में हैं। जैसे ही भाव ऊंचे स्तर पर पहुंचते हैं, मुनाफावसूली शुरू हो जाती है। इसके बाद थोड़ी गिरावट आते ही फिर से खरीदारी दिखती है। यही कारण है कि बाजार में स्थिरता नहीं बन पा रही। खासकर चांदी में कमोडिटी ट्रेडिंग और फिजिकल डिमांड का टकराव इसे सबसे ज्यादा अस्थिर बना रहा है। “सोने और चांदी में जो तेजी दिख रही है, वह पूरी तरह टिकाऊ नहीं कही जा सकती। अंतरराष्ट्रीय संकेत और घरेलू सट्टेबाजी दोनों मिलकर बाजार को अस्थिर बना रहे हैं। आम ग्राहकों को चाहिए कि वे एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध खरीद करें। सीमित निवेश बेहतर रणनीति हो सकती है।”
-श्रीनारायण सोनी, वरिष्ठ सर्राफा विशेषज्ञ


