दिल्ली ब्लास्ट, कश्मीर-लखनऊ में 8 जगहों पर NIA की रेड:आतंकी शाहीन और ड्रोन हमलों की प्लानिंग करने वाले बिलाल के घर की तलाशी ली

दिल्ली आतंकी ब्लास्ट मामले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में 8 जगहों पर छापेमारी की। एजेंसी ने कश्मीर में मौलवी इरफान अहमद, डॉ. आदील, डॉ. मुजम्मिल, आमिर राशिद और जसीर बिलाल और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में शाहीन के घर पर धावा बोला। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, NIA की छापेमारी शोपियां के नादिगाम गांव, पुलवामा के कोइल, चंदगाम, मलंगपोरा, संबूरा और कुलगाम में की गई। इसके अलावा डॉ. उमर नबी के साथी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश के घर पर भी छानबीन की गई। ​​​​​​उस पर हमास की तरह भारत में ड्रोन हमलों की साजिश रचने का आरोप है। एजेंसी सूत्रों के मुताबिक टीमें ऐसे सबूतों की तलाश कर रही हैं जो व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। तलाशियों में नए सबूत मिले या नहीं इसको लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। छापेमारी की 2 तस्वीरें देखें… पहले दिल्ली धमाके के बारे में जानिए… दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर की शाम 6:52 बजे सफेद रंग की हुंडई कार में धमाका हुआ था। ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हुई थी। कार को आतंकी डॉ. उमर चला रहा था। कार ब्लास्ट में अब तक NIA ने मौलवी इरफान, डॉ. आदिल, जसीर बिलाल समेत 7 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं। धमाके में खुद को उड़ाने वाला डॉ. उमर भी पुलवामा का रहने वाला था। वह फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। आज की 2 बड़ी अपडेट 1. लखनऊ में डॉ. शाहीन के घर पहुंची NIA की टीम दिल्ली ब्लास्ट की मास्टरमाइंड डॉ. शाहीन सईद के घर सोमवार सुबह NIA की टीम पहुंची। NIA टीम के साथ स्थानीय पुलिस भी मौजूद रही। डॉ. शाहीन का घर लखनऊ के लालबाग में है। यहां उसके पिता सईद अंसारी रहते हैं। घर जांच के दौरान बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया। उधर लोगों का आना-जाना लगभग बंद हो गया। NIA की टीम अंदर गई उसके पिता सईद अंसारी से काफी देर तक बातचीत की। बताया जा रहा था कि NIA की टीम अपने साथ डॉ. शाहीन को भी लेकर लखनऊ आई थी, लेकिन ऐसा नहीं है। 2. पुंछ में VPN सेवाएं बंद पुंछ जिले में सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से सभी VPN सेवाएं दो महीने के लिए बंद कर दी हैं। आदेश में कहा गया है कि हाल के दिनों में बढ़ी सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए यह फैसला जरूरी था। अधिकारियों के मुताबिक, VPN के जरिए जानकारी बाहर जाने और संदिग्ध गतिविधियों के बढ़ने का खतरा था। इसलिए पूरे जिले में VPN पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। दरअसल VPN एक ऐसा एप या सर्विस होती है जो आपके मोबाइल/कंप्यूटर की इंटरनेट लोकेशन और पहचान छिपा देती है। जब आप VPN ऑन करते हैं, तो आपका इंटरनेट किसी दूसरे देश या दूसरी जगह से चलता हुआ लगता है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से जारी आदेश देखें… जसीर पर उमर को टेक्निकल सपोर्ट देने का आरोप NIA ने 17 नवंबर को जसीर को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था। वह अनंतनाग के काजीकुंड का रहने वाला है। उसने अनंतनाग जिले के काजीगुंड से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है। दिल्ली ब्लास्ट में इसकी सक्रिय भूमिका रही है। आरोप है कि जसीर बम विस्फोट के लिए ड्रोन मॉडिफाई करता था और रॉकेट बनाने की भी कोशिश की थी। जसीर पिछले साल अक्टूबर में कुलगाम की एक मस्जिद में उमर से पहली बार मिला था। इसके बाद वह टेरर मॉड्यूल में शामिल हो गया। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में अन्य आतंकी चाहते थे कि जसीर जैश-ए-मोहम्मद के लिए एक एक्टिव वर्कर के रूप में काम करे, लेकिन उमर ने उसे आत्मघाती हमलावर बनने के लिए उकसाया। हालांकि, अप्रैल 2025 में जसीर ने आर्थिक तंगी और इस्लाम में आत्महत्या को हराम बताते हुए आत्मघाती हमलावर बनने से इनकार कर दिया। लेकिन उसने आतंकी उमर को टेक्निकल सपोर्ट देना जारी रखा। उमर और मुजम्मिल के बीच 40 लाख को लेकर झगड़ा हुआ था NIA जांच में पता चला कि डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल के बीच 40 लाख रुपए को लेकर झगड़ा हुआ था। फंडिंग जमात की तरफ से हुई थी। इसी पैसे से सामान खरीदने में हुए खर्च को लेकर उमर और मुजम्मिल की बीच तनाव था। NIA टीम ने फरीदाबाद की अल-अलाह यूनिवर्सिटी के पास की मस्जिद से मौलवी इश्तियाक को गिरफ्तार किया था। इसे ही जमात के जरिए कई लाख रुपए मिले थे, जिसका इस्तेमाल मुजम्मिल ने ब्लास्ट के लिए सामान खरीदने में किया था। सूत्रों के मुताबिक इन्हीं पैसों में हेरफेर को लेकर मुजम्मिल और उमर के बीच तनाव था। ———————— दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कौन है डॉक्टरों का ब्रेनवॉश करने वाला मौलवी इरफान: PoK में प्लानिंग, कश्मीर से कनेक्शन, कैसे यूनिवर्सिटी बनी शकील-उमर का ठिकाना NIA जांच में अब तक पता चला है कि व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क की शुरुआत कश्मीर के नौगाम से हुई थी। इसी दौरान पुलिस मौलवी इरफान अहमद तक भी पहुंची, जिसने डॉक्टरों को ब्रेनवॉश किया था। फरीदाबाद मॉड्यूल में शामिल सभी डॉक्टरों को मौलवी इरफान ने कट्टरपंथी बनाया था। वह श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में काम करता था और सभी स्टूडेंट के संपर्क में था। इरफान नौगाम मस्जिद का इमाम भी था। पूरी खबर पढ़ें…

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