भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (बीएमवीएसएस) में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। संस्था अब दिव्यांगों को अत्याधुनिक मायो इलेक्ट्रिक हैंड मुफ्त में उपलब्ध कराएगी। जयपुर फुट यूएस के चेयरमैन प्रेम भंडारी ने बताया- यह प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में है। इस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी शोधकर्ता स्टीवन रेमर के साथ जयपुर फुट यूएस के सलाहकार ओपी और आलकेश चौधरी दंपति जयपुर पहुंचे हैं। टीम छह मायो इलेक्ट्रिक हैंड लेकर आई है, जिनकी टेस्टिंग बीएमवीएसएस में शुरू हो गई है। यह प्रोजेक्ट 2018 में संस्था के संस्थापक पद्मभूषण डॉ. डीआर मेहता की प्रेरणा से शुरू हुआ था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसमें देरी हुई। अब इसका पहला संस्करण ‘जयपुर हैंड’ के नाम से तैयार हो चुका है। मायो इलेक्ट्रिक हैंड की विशेषता है कि यह सेंसर-आधारित प्रॉस्थेटिक हैंड है, जो दिमाग से सीधे कमांड लेकर असली हाथ की तरह काम करता है। पश्चिमी देशों में इस हैंड की कीमत 20 से 80 लाख रुपए तक है। हालांकि, सफल परीक्षण के बाद इसका निर्माण बीएमवीएसएस में किया जाएगा और जरूरतमंद दिव्यांगों को निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहल दुनियाभर के लाखों दिव्यांगों के जीवन को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी। वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 57.7 मिलियन अंग प्रत्यारोपण (लिम्ब एम्प्युटेशन) के मामले हैं और हर साल एक मिलियन से अधिक अंग खोने की घटनाएं होती हैं, यानी हर 30 सेकेंड में एक व्यक्ति अपना अंग खोता है। इनमें से अधिकांश विकलांग व्यक्ति निम्न-आय वाले देशों में रहते हैं, जहां आधुनिक प्रोस्थेटिक डिवाइस की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे लोगों के लिए यह प्रोजेक्ट एक वरदान साबित होगा, जो उन्हें न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वतंत्रता प्रदान करेगा, बल्कि जीवन में आत्मनिर्भरता का एहसास भी कराएगा।


