जालंधर | संगीत सम्मेलन के अंतिम दिन ग्वालियर घराने की शैली का ताकतवर प्रभाव दिखा। दिव्या शर्मा ने राग जोग में बंदिश सुनाई- आए मोरे बालमा…। उनके साथ संगत पर हरमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा, तबले पर शशांक मिश्रा भी थे। ठंडी बयार के बीच उन्होंने खुशी के भाव से भरपूर प्रस्तुति दी। उनके गायन की सबसे बड़ी विशेषता उनका “भाव’ रहा। उन्होंने केवल सुरों की रंगत ही नहीं प्रस्तुत की बल्कि बंदिश के हर शब्द को श्रोताओं के मन तक पहुंचाया। उन्होंने करीब 1 घंटा प्रस्तुति दी।


