राजधानी भोपाल में बिजली खपत का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। बीते एक साल में शहर में 61 हजार नए बिजली कनेक्शन जुड़े हैं, जिससे भोपाल मध्यप्रदेश में नए कनेक्शन जोड़ने के मामले में सबसे आगे निकल गया है। इसका सीधा असर यह हुआ कि दिसंबर जैसे ठंडे महीने में भी बिजली की मांग अप्रैल-मई जैसी हो गई और भोपाल में अधिकतम मांग 394 मेगावॉट दर्ज की गई। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, 1 साल पहले भोपाल में करीब 5.49 लाख बिजली कनेक्शन थे। जो अब बढ़कर करीब 6.10 लाख तक पहुंच गए हैं। भोपाल में अप्रैल में अधिकतम डिमांड 419 से 422 मेगावॉट तक पहुंचती है। बिजली कंपनी के सीजीएम भोपाल रीजन बीबीएस परिहार के मुताबिक, “भोपाल में आवासीय विस्तार, अपार्टमेंट कल्चर, इलेक्ट्रिक उपकरणों की बढ़ती संख्या और कमर्शियल एक्टिविटी के कारण कनेक्शन और लोड दोनों तेजी से बढ़े हैं। दरअसल 24 दिसंबर को मध्यप्रदेश में बिजली की मांग ने 19572 मेगावाट का अब तक का सर्वोच्च स्तर छू लिया। यह रिकॉर्ड सुबह 10.43 बजे दर्ज हुआ। खास बात यह रही कि इतनी ऊंची मांग के बावजूद पूरे प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति की गई। इससे पहले 23 दिसंबर को मांग 19371 मेगावाट दर्ज हुई थी। 16 जिलों में भोपाल बड़ा लोड सेंटर बनकर उभरा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (भोपाल-ग्वालियर रीजन) की जद में 16 जिले शामिल हैं। बुधवार को इसमें बिजली की अधिकतम मांग 6221 मेगावाट दर्ज की गई। भोपाल इस क्षेत्र का सबसे बड़ा लोड सेंटर बनकर उभरा है। आवासीय कॉलोनियों, मॉल, अस्पताल, आईटी और शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ती खपत ने मध्य क्षेत्र की प्रोफाइल बदल दी है। भविष्य की मांग को देखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड पर फोकस किया जा रहा है। भास्कर एक्सपर्ट – राजेंद्र अग्रवाल, ऊर्जा मामलों के जानकार मेट्रो-टाइप एनर्जी पैटर्न की ओर बढ़ता शहर
भोपाल में कनेक्शन और लोड की बढ़ोतरी यह संकेत है कि शहर तेजी से मेट्रो-टाइप एनर्जी पैटर्न की ओर बढ़ रहा है। अब केवल सप्लाई नहीं, बल्कि पीक-लोड मैनेजमेंट, स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी एफिशिएंसी पर काम जरूरी है। 19572 मेगावॉट के रिकॉर्ड लोड पर भी सप्लाई
प्रदेश में बढ़ती शहरीकरण की रफ्तार, औद्योगिक गतिविधियों और घरेलू बिजली उपयोग में इजाफे ने बिजली की मांग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। दिसंबर में पहली बार गर्मियों जैसी डिमांड सामने आई। ऊर्जा विभाग की बेहतर प्लानिंग, मल्टी-सोर्स सप्लाई और रियल-टाइम मैनेजमेंट के चलते 19572 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के बावजूद बिजली आपूर्ति पूरी तरह स्थिर रही।


