‘दुनिया में टॉप थ्री में होगा भारत’:आगरा में रक्षामंत्री राजनाथ बोले-अमेरिका के वक्ता ने कहा था कि भविष्य देखना है, तो भारत आओ

‘भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में 11वें से 5वें स्थान पर पहुंच गया है। अगले दो-ढाई साल में दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल हो जाएगा। ये भारत सरकार और सभी देशवासियों के सहयोग से संभव होगा। आज अपना देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। अमेरिका के वक्ता ने कहा था कि भविष्य देखना, काम करना चाहते हो तो भारत आओ।’ ये बातें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कही। मौका था आगरा के मुफीद-ए-आम इंटर कॉलेज में अयोजित उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के 57वें राज्य सम्मेलन का। राजनीति में कथनी और करनी में अंतर
रक्षामंत्री ने कहा- राजनीति में कथनी और करनी में अंतर होने के कारण राजनेताओं पर भरोसा कम हुआ है। हमने संभल कर काम किया। राजनीति क्षेत्र में रहकर किसी को गुमराह नहीं करना चाहिए। कहा कि आश्वासन नहीं देता प्रयास करता हूं। शिक्षकों की भूमिका बताने के आवश्यकता नहीं, श्रीकृष्ण भी शिक्षक थे। राजनीति में आने से पहले मैं शिक्षक था। भले अब शिक्षक नहीं, पढ़ाने का क्रम टूटा है, लेकिन पढ़ाई जारी है। सूचना देने और शिक्षित करने में अंतर
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- कंप्यूटर युग में युवाओं को सूचनाओं का अभाव नहीं है। उन्हें एक क्लिक में सूचनाएं मिल रही हैं। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका पर सवाल उठ रहा है। लेकिन सूचना देने और शिक्षित करने में बहुत अंतर है। सही विकल्प का चयन विवेक से होता है, जो शिक्षक पैदा करता है। आप किसी बच्चे का भविष्य बनाते है तो राष्ट्र का भविष्य बनाते हैं और उम्मीद है आप अपनी जिम्मेदारी अवश्य निभाएंगे। शिक्षाा के साथ-साथ बच्चों में सांस्कृतिक चेतना भी जगानी होगी। फैसला उत्तर प्रदेश की सरकार लेगी
शिक्षकों की पुरानी पेंशन बहारी की मांग पर रक्षामंत्री ने कहा कि आपकी जो मांग है, उसको लेकर मुख्यमंत्री से मिलिए। यदि तर्कसंगत मांग है तो विचार अवश्य होगा। फैसला उप्र सरकार को लेना है। मैं भी सीएम योगी से मिलकर बोलूंगा। जायज है तो सीएम योगी अवश्य पूरी करेंगे।
उन्होंने कहा कि मैं बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न होने देना चाहता था, न ऐसा चाहता हूं। तब मेरे द्वारा लाया गया नकल विरोधी कानून दो बार कैबिनेट से वापस हुआ था। बच्चों को जेल नहीं भेजना था, लेकिन सख्त कदम उठाने थे। मैं नुकसान उठाने को तैयार था।

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