लुधियाना जिले के जगराओं में दुबई से डिपोर्ट हुए एक नशा तस्कर को फिर से नशे के काले कारोबार में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह आरोपी दुबई में नशा तस्करी के मामले में 10 साल की सजा काट चुका था और जगराओं इलाके में एक वर्कशॉप की आड़ में हेरोइन सप्लाई कर रहा था। सीआईए स्टाफ की मुस्तैदी से उसके मंसूबों पर पानी फिर गया। सीआईए स्टाफ ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए कार सवार दो नशा तस्करों को उस समय दबोच लिया, जब वे दूसरे शहर से हेरोइन लेकर अपने गांव गालिब कलां लौट रहे थे। नाकाबंदी के दौरान आरोपियों की कार की तलाशी ली गई, जिसमें से 278 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान परमजीत सिंह उर्फ पम्मा और दविंदर सिंह उर्फ प्रगट के रूप में हुई है, जो गांव गालिब कलां के निवासी हैं। नाकाबंदी पर जांच के दौरान पकड़े गए सीआईए स्टाफ के एसआई गुरसेवक सिंह ने बताया कि पुलिस पार्टी गालिब कलां से कोकरी जाने वाली लिंक रोड पर गश्त कर रही थी। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि दोनों आरोपी बड़े स्तर पर हेरोइन तस्करी का धंधा कर रहे हैं और लुधियाना जिले सहित आसपास के इलाकों में इसकी सप्लाई करते हैं। सूचना के अनुसार, दोनों आरोपी कार में सवार होकर कोकरी साइड से गांव गालिब कलां की ओर आ रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव गालिब कलां के रास्ते में नाकाबंदी कर आरोपियों की कार को रोक लिया। तलाशी के दौरान कार से भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की गई। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना सदर जगराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर तीन दिन का रिमांड लिया गया है और आगे की पूछताछ शुरू कर दी गई है। दुबई में दर्ज है नशा तस्करी का केस जांच अधिकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी परमजीत सिंह उर्फ पम्मा पर दुबई में भी नशा तस्करी का मामला दर्ज था, जिसमें उसे 10 साल की सजा हुई थी। सजा पूरी होने के बाद दुबई सरकार ने उसे भारत डिपोर्ट कर दिया था, लेकिन भारत लौटने के बाद भी उसने नशे का कारोबार नहीं छोड़ा। आरोपी इलाके में कार वर्क शॉप का धंधा करने के साथ अपने कारिंदे संग मिलकर नशे का कारोबार चलाने लगा।


