दुर्ग जिले का 2500 साल पुराना गांव खतरे में:मिट्टी कटाव से 40 फीट जमीन बही; किनारों पर पीचिंग का काम अधूरा

दुर्ग जिले के पुरातात्विक महत्व वाले तरीघाट गांव में खारुन नदी का जलस्तर बढ़ने से मिट्टी कटाव की समस्या गंभीर हो गई है। स्टॉप डैम की वजह से अब तक 40 फीट तक की जमीन बह चुकी है। गांव के रहने वाले भास्कर सिंह चेलक का कहना है कि इस बार कटाव बेहद तेज है। यह कटाव गांव के ऊंचे टीले तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि अगर समय रहते उपाय नहीं किए गए तो अगले दो-तीन साल में नदी का पानी बस्तियों तक पहुंच सकता है। सरपंच चंद्रिका साहू ने स्टॉप डैम के निर्माण पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक किनारों पर पीचिंग का काम सिर्फ कुछ ऊंचाई तक ही किया गया। अगर यह काम 40-50 फीट तक किया जाता तो कटाव नहीं होता। हर बारिश में मिट्टी बह रही है। इससे ग्रामीणों के जान-माल को खतरा है। शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा – प्रशासन ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को ज्ञापन देने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आश्वासन दिया है कि जल संसाधन विभाग से सर्वे कराया जाएगा। रिटेनिंग वॉल या अन्य संरचना के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। खतरे में 2500 साल पुराना शहर तरीघाट केवल एक गांव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता का गवाह है। यहां 2,500 साल पुराने नियोजित शहर के अवशेष भी मिले हैं, जिनमें जल निकासी प्रणाली, सड़कें, मुहरें और विदेशी सिक्के शामिल हैं। यहां के प्रमाण कुषाण, सातवाहन और इंडो-यूनानी काल से जुड़े हैं। इतिहासकार बताते हैं कि यह स्थान कभी व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था, जो भीषण अग्निकांड में नष्ट हो गया। पुरातत्वविदों के अनुसार यहां मनके व आभूषण निर्माण के साक्ष्य, विष्णु की मूर्ति और महामाया मंदिर जैसे धार्मिक प्रतीक भी पाए गए हैं। लेकिन अब लगातार हो रहे मिट्टी कटाव से यह धरोहर धीरे-धीरे खत्म होने के कगार पर पहुंच रही है।

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