छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में डिजिटल राजस्व अभिलेख में पिछले दिनों एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। अहिवारा और पाटन तहसील में भुईया सॉफ्टवेयर के डेटा में अवैध बदलाव किए गए। अहिवारा तहसील के मामले में ग्राम अछोटी और मुरमुंदा के ऑनलाइन रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई। आरोपियों ने पटवारी आईडी का दुरुपयोग कर संदिग्ध खसरे बनाए। रायपुर निवासी दिनू राम यादव और अछोटी निवासी एसराम बंजारे ने इन फर्जी खसरों के आधार पर भारतीय स्टेट बैंक से कृषि ऋण लिया। बैंक दस्तावेजों की जांच में नायब तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर मिले। साथ ही जाली सील, नकली किसान किताब और फर्जी 7/12 पर्ची भी पाई गई। आरोपियों ने पहले ऑनलाइन सिस्टम में खसरे बदलकर जमीन अपने नाम कराई। फिर उसी आधार पर लोन ले लिया। दोनों मामले में FIR पाटन तहसील में ग्राम मोतीपुर के खसरा नंबर 242 और 315 में गड़बड़ी की गई। ऑफलाइन रिकॉर्ड में जहां केवल 2-2 बटांकन थे, वहीं ऑनलाइन रिकॉर्ड में बिना किसी राजस्व न्यायालय आदेश के 6-6 अतिरिक्त बटांकन जोड़ दिए गए। इन पर तारण सिंह राजपूत, सुरेंद्र कुमार और मिथिलेश कुमार के नाम अवैध रूप से दर्ज किए गए। पुलिस ने दोनों मामलों में बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली है। हल्का पटवारी की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि खसरा नंबर 242/1 का रकबा 3.144 हेक्टेयर और 242/2 का 0.400 हेक्टेयर है, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में 242/3 से 242/8 तक नए बटांकन जोड़े गए। यही हाल खसरा नंबर 315 के साथ हुआ। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्य संगठित तरीके से किया गया और उद्देश्य भविष्य में इन जमीनों का वित्तीय लेन-देन में दुरुपयोग करना था। तकनीकी जांच से खुली परतें दोनों मामलों में एनआईसी से प्राप्त लॉग रिपोर्ट और ऑफलाइन-ऑनलाइन रिकॉर्ड के मिलान में साफ हुआ कि भुईया सॉफ्टवेयर में बिना अनुमति प्रवेश कर डाटा में हेरफेर की गई। पुलिस अब आईटी टीम की मदद से यह पता लगाने में जुटी है कि बदलाव किन आईपी एड्रेस से और किन तिथियों में किया गया। अहिवारा के मामले में जहां फर्जी खसरे बनते ही तुरंत बैंक से लोन लिया गया, वहीं पाटन में जमीन को दस्तावेजी रूप से वैध बनाने की तैयारी थी ताकि आगे बड़े पैमाने पर लेन-देन हो सके। गंभीर धाराओं में मामला दर्ज पुलिस ने दोनों मामलों में बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 3(5) और आईटी एक्ट की धारा 66(C) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह घोटाला केवल दो गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें जिले के अन्य क्षेत्रों तक फैली हो सकती हैं। सवालों के घेरे में डिजिटल सुरक्षा इन घटनाओं ने डिजिटल भूमि रिकॉर्ड की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्व अधिकारियों का मानना है कि यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें राजस्व कर्मियों से लेकर बाहर के तकनीकी लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस की जांच में आने वाले दिनों में और चौंकाने वाले खुलासे संभव हैं। जांच के आधार पर होगी कार्रवाई- एसपी दुर्ग पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि अम्लेश्वर, कुम्हारी और नंदिनी थाना में कल तीन एफआईआर दर्ज हुए हैं ।इसमें सरकारी जमीन का बटांकन बदलकर इसमें लोन लेने का प्रयास किया गया है। इस मामले में तहसीलदार की ओर से एफ आई आर दर्ज कराई गई है इन सारे मामलों की जांच के लिए अलग से टीम बनाई गई है और टीम इसकी जांच करेगी । आगे जांच में जिस प्रकार से तथ्य आएंगे उसे प्रकार से कार्रवाई की जाएगी।


