दुर्ग जिला न्यायालय ने अपने ही बड़े भाई की हत्या के मामले में आरोपी विनय प्रताप ठाकुर उर्फ इशू (33) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने IPC की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए आरोपी पर 1 हजार का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने कहा कि हत्या गंभीर है, लेकिन यह “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” नहीं है। यह फैसला सत्र न्यायाधीश के विनोद कुजूर ने सुनाया। क्या था मामला? घटना 28 फरवरी 2023 की है, जब शंकर नगर वार्ड 11, दुर्ग में पारिवारिक विवाद के चलते विनय ने अपने बड़े भाई विश्वजीत सिंह ठाकुर उर्फ गोलू की हत्या कर दी थी। आरोपी ने पहले अपने माता-पिता को कमरे में बंद किया और चेतावनी दी कि विश्वजीत के पास मत जाना। बाद में उसने भाई के कमरे में जाकर कहा कि इस घर में मेरा राज चलेगा। इसके बाद विनय ने गुस्से में विश्वजीत पर हमला कर दिया। सील-बट्टा और गला दबाने की आवाजें सुनाई दीं। जब माता-पिता कमरे से बाहर निकले तो विश्वजीत मृत अवस्था में मिला। उसके सिर पर गंभीर चोटें थीं। पुलिस कार्रवाई और जांच मोहन नगर थाना पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लिया। घटना स्थल से खून लगा सील-बट्टा, कपड़े और अन्य सबूत जब्त किए गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साबित हुआ कि मौत सिर पर गंभीर वार और अत्यधिक रक्तस्राव से हुई थी। आरोपी का मेमोरेंडम बयान भी दर्ज किया गया, जिसमें उसने बरामदगी कराई। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें लोक अभियोजक एमके दिल्लीवार ने दलील दी कि यह हत्या अत्यंत क्रूर श्रेणी की है, इसलिए कठोर सजा मिलनी चाहिए। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और मामला “विरल से विरलतम” श्रेणी में नहीं आता, इसलिए न्यूनतम दंड दिया जाए। कोर्ट का फैसला कोर्ट ने माना कि हत्या गंभीर है, लेकिन यह “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” नहीं है। कोर्ट ने कहा कि “मृत्युदंड अपवाद है और आजीवन कारावास नियम।” सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विनय प्रताप ठाकुर को आजीवन कारावास की सजा पर्याप्त मानी गई। जेल भेजा गया आरोपी फैसले के बाद आरोपी विनय प्रताप ठाकुर उर्फ इशू को सजा वारंट जारी कर केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया।


