दुर्ग में राशनकार्ड की सूची से 16 हजार नाम कटे:कोई शासकीय कर्मचारी ले रहा था योजना का लाभ तो कोई 25 लाख जीएसटी पटा कर भी बना था कार्डधारक

दुर्ग जिले में राशन कार्ड सत्यापन के बाद 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच कुल 15,872 सदस्यों के नाम राशन कार्ड सूची से हटाए गए हैं। राज्य सरकार को जिले में एक लाख से अधिक फर्जी राशन कार्ड होने की सूचना मिलने के बाद खाद विभाग को व्यापक सत्यापन के निर्देश दिए गए थे। सत्यापन के बाद जिले में करीब 16 हजार हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए गए हैं। खाद विभाग के आंकड़ों के अनुसार नाम कटने का सबसे बड़ा कारण हितग्राहियों द्वारा स्वयं राशन कार्ड समर्पित करना रहा, जिसमें 6,187 सदस्य शामिल हैं। इसके बाद परिवार के मुखिया की मृत्यु, अन्यत्र निवास और परिवार का पलायन प्रमुख कारण रहे। इसके अलावा सत्यापन के समय निवास पर नहीं पाए जाने और मकान या भूखंड निर्धारित सीमा से अधिक होने के चलते भी नाम हटाए गए। पात्रता के आधार की पुष्टि नहीं इसलिए भी कटे नाम
दुर्ग जिले में जिनके नाम कटे हैं उनमें ऐसे भी राशन कार्ड धारी मिले जिनके पात्रता के आधार की पुष्टि नहीं हुई। इस वजह से उनके नाम को भी काट दिया गया है। इसके अलावा मृत्यु एवं आश्रित के नाम पर जारी कार्ड, मासिक आय निर्धारित सीमा से अधिक होना और शासकीय कर्मचारी होने के बाद भी राशन कार्ड में जुड़वाने वालों के नाम काटे गए गए हैं। वहीं डबल राशन कार्ड के साथ ही चार/तीन पहिया वाहन उपलब्ध, अविवाहित और संयुक्त परिवार जैसे कारण भी सामने आए। EKYC बना सबसे बड़ी परेशानी
इन दिनों जिले के खाद विभाग कार्यालयों में ऐसे हितग्राहियों की भीड़ रोज देखी जा रही है, जिनके नाम राशन कार्ड से कट चुके हैं। अधिकांश मामलों में वजह आधार या EKYC अपडेट न होना, परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु की सूचना समय पर न देना या फिर पलायन कर दूसरे शहर में बस जाना है। हितग्राहियों का कहना है कि यदि राशन कार्ड में एक भी सदस्य का EKYC अपडेट नहीं होता, तो पूरे परिवार को राशन नहीं मिल रहा, जिससे गरीब परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जीएसटी 25 लाख से अधिक, उनका भी नाम काटा
जिला प्रशासन का कहना है कि ऐसे लोगों का भी नाम काटा गया है जिनकी जीएसटी 25 लाख से अधिक की है या जिनकी इनकम 6 लाख से अधिक है। अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर उन सभी के नाम काटे गए हैं। इसके बाद भी जिनको लगता है, की वे लोग पात्रता की हकदार है। तो वे लोग निर्धारित दस्तावेज और E KYC अपडेट कर खाद्यान्न योजना का लाभ उठा सकते है। खाद्य नियंत्रक बोले- फर्जी राशन कार्ड नहीं मिले
जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारी अनुराग भदौरिया का कहना है कि राज्य सरकार के निर्देश के बाद जब सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। तब फर्जी राशन कार्ड नहीं मिले हैं। कार्डधारीयो का नाम नहीं काटा गया है। बल्कि विभिन्न कारणों से करीब 16 हजार सदस्यों के नाम काटे गए हैं। इनमें वे लोग शामिल है जिनका केवाईसी अपडेट नहीं था, या फिर जिनकी मृत्यु हो गई थी, या जो लोग पलायन कर गए हैं। अलग-अलग कारणों की वजह से कटे 15,872 नाम
लोगों को अवेयर करने किया जा रहा प्रयास
जिला प्रशासन की ओर से उचित मूल्य दुकानों और समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे समय रहते आधार अपडेट और EKYC प्रक्रिया पूरी करें। प्रशासन का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य वास्तविक और जरूरतमंद लोगों तक ही सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ पहुंचाना है।

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