दुर्ग में STF आवास निर्माण का विरोध:सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे कलेक्ट्रेट, बोले- हमारे गांव में जमीन की कमी, नहीं बनने देंगे सरकारी आवास

दुर्ग जिले के पीपरछेड़ी गांव में एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) के कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए आवास निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को गांव के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और शासकीय भूमि को एसटीएफ को दिए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देते हुए कहा कि हमारे गांव में जमीन की कमी है। ऐसे में गांव की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि एसटीएफ द्वारा गांव की करीब 10 एकड़ पुस्तैनी और सामुदायिक उपयोग की जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इस भूमि पर वर्तमान में गांव का मुक्तिधाम, मंदिर और खेल मैदान स्थित है। साथ ही इसी स्थान पर भविष्य में हाट-बाजार निर्माण का प्रस्ताव भी है, जिससे सैकड़ों ग्रामीणों की आजीविका जुड़ी हुई है। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को तुगलकी फरमान करार देते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने को मजबूर होंगे। ग्राम सभा में पहले ही हो चुका है विरोध का प्रस्ताव
पीपरछेड़ी की सरपंच ललिता निषाद ने बताया कि ग्राम सभा की बैठक दिनांक 28 जनवरी 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें 65 सदस्यों की उपस्थिति में सर्वसम्मति से प्रस्ताव क्रमांक 18 पारित कर इस भूमि को एसटीएफ आवास निर्माण के लिए न देने का निर्णय लिया गया था। इस संबंध में दुर्ग कलेक्टर को लिखित ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है। विरोध के बाद भी नहीं रुक रही गतिविधियां
सरपंच ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद एसटीएफ की टीम गांव पहुंची और करीब 10 फीट मिट्टी खुदाई कर रिसर्च के लिए ले जाने लगी, जिसे ग्रामीणों ने मौके पर ही रोक दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह जमीन गांव के विकास कार्यों, बच्चों के भविष्य और महिला सदन जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों के लिए आरक्षित है, इसलिए किसी भी हालत में इसे नहीं दिया जाएगा। विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित है भूमि
ग्रामीणों के अनुसार उक्त भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें प्रतीक्षालय भवन, व्यावसायिक परिसर, बच्चों के लिए खेलकूद मैदान (मिनी स्टेडियम), हाट-बाजार और भविष्य में राज्य सरकार की योजना के तहत महतारी सदन का निर्माण शामिल है। ग्राम पंचायत का कहना है कि गांव में पहले से ही भूमि का अभाव है और यही एकमात्र स्थान सामुदायिक विकास के लिए उपलब्ध है। गांव के नागरिक मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम की जमीन पर भी अतिक्रमण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह जमीन गांव की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ी है और इसे किसी भी विभाग को सौंपना ग्रामीणों के अधिकारों का हनन है। प्रशासन ने लिया ज्ञापन
वहीं तहसीलदार हरिओम द्विवेदी ने बताया कि बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे और उन्होंने अपनी मांग रखी है। ग्रामीणों द्वारा सौंपा गया ज्ञापन कलेक्टर तक पहुंचा दिया गया है और पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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