राजस्थान कैबिनेट बैठक में नवगठित जिलों में से 9 जिले और 3 संभाग खत्म करने के निर्णय पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। हमने पूरी स्टडी करके जिले बनाए थे। पता नहीं भाजपा सरकार ने किस आधार पर खत्म किए। गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि जिस भी राज्य में देख लो। छोटे जिले हैं। मध्यप्रदेश आकार में राजस्थान से छोटा है फिर भी उसमें 53 जिले हैं। फिर हमारे 50 ज्यादा कैसे हुए? यदि दूरी को आधार बनाकर खत्म किए हैं तो नया जिला डीग तो भरतपुर से मात्र 38 किलोमीटर ही है। उसे खत्म क्यों नहीं किया? सांचौर को देखें तो उसके अंतिम छोर के गांव की जालौर से 200 किलोमीटर तक दूरी होगी। हमने प्रयोग के तौर पर केवल एक दूदू को छोटा जिला बनाया, बाकी सभी जगह जनता की लंबे समय से मांग थी । हमने तो कलेक्टर, एसपी समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति दी एवं हर जिले को बजट भी दिया। गहलोत ने कहा कि सरकार की तरफ से एक तर्क यह दिया जा रहा है कि एक जिले में कम से कम 3 विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए, जबकि भाजपा द्वारा 2007 में बनाए गए प्रतापगढ़ मे परिसीमन के बावजूद भी केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं। सरकार द्वारा जहां कम दूरी का तर्क दिया जा रहा है वो भी आश्चर्यजनक है। डीग की भरतपुर से दूरी केवल 38 किमी है जिसे रखा गया है, लेकिन सांचौर से जालोर की दूरी 135 किमी एवं अनूपगढ़ से गंगानगर की दूरी 125 किमी होने के बावजूद उन जिलों को रद्द कर दिया गया। 35 से घटाकर 15.35 लाख पर बनाया था जिला: गहलोत ने कहा कि पहले राजस्थान में हर जिले की औसत आबादी 35.42 लाख थी। हमने नए जिले बनने के बाद जिलों की औसत आबादी 15.35 लाख हुई। जिले से गांवों की दूरी घटी। बदले की भावना से फैसला: गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। बदले की भावना से खत्म किए हैं।


