इंदौर में दूषित पानी से हो रही मौतों की खबरों ने लोगों में इस कदर दहशत फैला दी है कि छात्र और कामकाजी लोग इंदौर छोड़कर अपने-अपने घर लौटने लगे हैं। इसी कड़ी में सिवनी जिले के रहने वाले 18 वर्षीय युवक आदित्य मिश्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन उसे इलाज के लिए जबलपुर ले आए, जहां निजी अस्पताल में उसका इलाज जारी है। जांच में आदित्य हेपेटाइटिस-A पॉजिटिव पाया गया है, जिसके चलते उसे डॉक्टरों की निगरानी में आईसीयू वार्ड में रखा गया है। आदित्य मिश्रा इंदौर के भंवरकुआं क्षेत्र स्थित एक कोचिंग संस्थान से बीबीए की पढ़ाई कर रहा था। वह किराए के कमरे में अकेला रहता था और सार्वजनिक नल से पानी भरकर पीता था। इसी दौरान आदित्य और उसके दो-तीन दोस्त एक साथ बीमार पड़ गए। आदित्य के अन्य साथी अपने-अपने घर लौट गए, जबकि आदित्य ट्रेकिंग के लिए देहरादून चला गया। ट्रेनिंग के दौरान देहरादून में बिगड़ी तबीयत परिजनों के अनुसार देहरादून में अचानक आदित्य को चक्कर आया और वह गिर पड़ा। उसकी नाक से खून बहने लगा। साथ गए टीचर और दोस्तों ने उसे घर लौटने की सलाह दी। इसके बाद दिल्ली के एक अस्पताल में जांच कराई गई, जहां डॉक्टरों ने भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह परिजनों को सूचना देकर जबलपुर आ गया। डॉक्टरों ने दूषित पानी को बताया बीमारी का कारण सरकारी विभाग में पदस्थ आदित्य के पिता राजेश मिश्रा ने बताया कि जब बेटा जबलपुर पहुंचा, तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी। तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में डेंगू रिपोर्ट नेगेटिव आई, लेकिन प्लेटलेट्स मात्र 17 हजार पाए गए। दांतों से लगातार ब्लीडिंग हो रही थी, हाथ-पैर कांप रहे थे। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने दूषित पानी को बीमारी का मुख्य कारण बताया है। राजेश मिश्रा ने बताया कि फिलहाल इलाज के बाद आदित्य की स्थिति पहले से बेहतर है। उन्होंने इंदौर में रह रहे सभी छात्रों से अपील की है कि वे अपनी सेहत को लेकर बेहद सतर्क रहें, पेयजल के लिए आरओ का उपयोग करें और सार्वजनिक नलों के पानी पर निर्भर न रहें।


