दूषित पानी ने छीन लिया 30 साल का साथ:पत्नी के जाने के बाद अब अकेले रह गए तुलसीराम, बोले – मेरा जीनवसाथी चला गया

भागीरथपुरा में दूषित पानी ने सिर्फ शरीर नहीं छीने, बल्कि पूरे-पूरे परिवार उजाड़ दिए। इस जहरीले पानी ने 23 लोगों की जिंदगियां काल के गाल में समा दीं और सैकड़ों लोगों को अस्पताल तक पहुंचा दिया। किसी ने अपना मासूम खो दिया, तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। किसी की मां हमेशा के लिए बच्चों से जुदा हो गई। इतना ही नहीं, इस दूषित पानी ने उन जीवनसाथियों को भी अलग कर दिया, जिन्होंने वर्षों तक एक-दूसरे का साथ निभाया था। ऐसा ही दर्दनाक हादसा तुलसीराम जरारिया के साथ हुआ। उनकी जीवनसंगिनी कमला बाई (55) दूषित पानी के कारण हमेशा-हमेशा के लिए मौत की नींद सो गईं। 30 साल का साथ कुछ ही पलों में छूट गया और अब तुलसीराम अपने जीवनसाथी के बिना जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। तुलसीराम ने दैनिक भास्कर से चर्चा में बताया कि उनके दोनों बच्चे शुरू से ही नानी के यहां रहते हैं। यहां वे और उनकी पत्नी ही रहते थे। वह पुताई और मजदूरी का काम करते थे। कभी काम मिल जाता था तो कर लेते थे, नहीं तो घर लौट आते थे। इसी तरह उनका घर चलता था। उन्होंने बताया कि वे पहले भागीरथपुरा में नहीं रहते थे। करीब 20 दिन पहले ही वे यहां आए थे। गणेश नगर में जहां वे पहले किराए से रहते थे, वहां मकान को लेकर नोटिस आ गया था। इसके बाद उन्होंने तुरंत वह मकान खाली किया और अपने एक परिचित के यहां किराए के कमरे में शिफ्ट हो गए। एक ही कमरे में बसी थी गृहस्थी
तुलसीराम भागीरथपुरा के जिस किराए के मकान में रहते हैं। वह एक ही कमरा है, उसी में दोनों पति-पत्नी अपनी गृहस्थी बसाकर रह रहे थे। कमरे में उनके घर का सामान रखा था। आलम यह है कि उनके घर में सोने के लिए पलंग तक नहीं है। छोटी-छोटी जरूरत की चीजें कमरे में रखी हुई थी। तुलसीराम जब अपनी पत्नी के साथ जब यहां शिफ्ट हुए तो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि उनके साथ ऐसा कुछ हो सकता है। तबीयत बिगड़ती अस्पताल ले गए
तुलसीराम ने बताया कि 5-6 जनवरी को उनके जीनवसाथी यानी कमलाबाई की तबीयत बिगड़ना शुरू हुई। सर्दी-खांसी और उल्टी-दस्त होने लगे। वे मेडिकल से दवा भी लेकर मगर उन दवाओं से भी तबीयत में कोई फर्क नहीं पड़ा। तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो वे उन्हें एमवाय अस्पताल ले गए। यहां पर बाहर से कई चीजें लाकर दी। कमला को नली डाली थी, मैं उससे बातचीत भी करने की कोशिश करता, लेकिन बात नहीं हो पाती थी। फिर 9 जनवरी की सुबह 6 से 7 बजे के बीच कमला की सांसें हमेशा के लिए थम गई और 30 सालों का साथ कुछ ही पल में छूट गया। उस कमरे में अकेले, पत्नी की फोटो के साथ
अब भागीरथपुरा के उस कमरे में वे अकेले हैं। पत्नी का फोटो लगा है, जिस पर उनका नाम और स्वर्गवास की तारीख लिखी है, फोटो पर माला चढ़ी है। फोटो के पास ही दीपक, अगरबत्ती और एक बंदी का पैकेट भी रखा था। तुलसीराम ने बताया कि इस कमरे में वे दोनों ही रहते थे। अब उनका जीवनसाथी चला गया और वे अकेले ही रह गए हैं। उनका आरोप है कि दूषित पानी के कारण उनका जीवनसाथी उनसे बिछड़ गया। दोषियों पर कार्रवाई के सवाल पर वे कहते हैं कि मैं तो अनपढ़ व्यक्ति हूं, क्या बता सकता हूं। ये खबर भी पढ़ें… हे भागीरथ! पानी से मौतें कब तक? फिर जानें गईं इंदौर में दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या नहीं थम रही है। सोमवार को मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 23 हो गया है। मृतक का नाम भगवानदास पिता तुकाराम भरणे (64) है। 30 दिसंबर की रात उन्हें अचानक उल्टी-दस्त शुरू हुए थे। रात करीब 11.30 बजे उन्हें नर्सिंग होम ले जाय गया था, जहां बेड नहीं होने पर उन्हें शैल्बी हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां कुछ घंटों बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। तब से वे आईसीयू में थे। पूरी खबर पढ़ें

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