अस्थायी बाजार सजा इधर, गंज स्थित चिल्ले से लेकर देहली गेट तक लगने वाला अस्थायी बाजार भी सज गया है। यहां पर खाने की अस्थायी होटलों के साथ ही गर्म कपड़े, होजरी और अन्य सामान की दुकानें लगी हैं। अलसुबह से ही बस स्टैंड व स्टेशन पर अकीदतमंदों की भीड़ रही। कव्वाल पार्टियों ने कलाम पेश किए इधर, गरीब नवाज के उर्स की महफिल का दौर भी जारी है। रात करीब 11 बजे महफिल खाना में दरगाह दीवान के पुत्र सैयद नसीरूद्दीन चिश्ती की सदारत में महफिल शुरू हुई। महफिल की शुरूआत दरगाह के वंशानुगत फातेह खान जुबेर अहमद, सैयद सफान अली, नाज़ अली और सैयद अयान अली द्वारा कुरान की आयात से शुरू की गई। शाही कव्वाल चौकी के साथ ही अन्य कव्वाल पार्टियों ने कलाम पेश किए। विभिन्न खानकाहों और दरगाहों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। मध्य रात्रि को चिश्ती मजार शरीफ का दूसरा गुस्ल देने के लिए पहुंचे। महफिलखाना में उर्स की महफिल की शुरुआत से पहले मौरूसी फातेहाख्वां फातेहा पढ़ते हुए। अजमेर | रजब महीने की पहली तारीख सोमवार को हो गई और दरगाह क्षेत्र में अकीदमंद की भीड़ बढ़ने लगी है। जियारत को पहुंच रहे जायरीन भी जुलूस के रूप में चादर फैला कर दरगाह तक पहुंचते नजर आ रहे हैं। इधर, रात को उर्स की दूसरी महफिल हुई और गरीब नवाज की मजार को गुस्ल दिया गया। उर्स में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहर व देहाती क्षेत्रों, बिहार और पश्चिम बंगाल से जायरीन के आने का सिलसिला तेज हो गया है। मध्य प्रदेश और दिल्ली आदि इलाकों से भी जायरीन पहुंचे हैं। प्राइवेट बसों से पहुंच रहे जायरीन कायड़ विश्राम स्थली पर ठहरे हैं। यहां से वे रोडवेज की बसों से शहर पहुंच रहे हैं। बसों से उतर कर जायरीन अलग-अलग दलों में फव्वारा सर्किल, गंज, देहली गेट और दरगाह बाजार होते हुए दरगाह पहुंच रहे हैं। इनमें से कुछ जायरीन ढोल नगाड़ों के साथ चादरें फैला कर लाते नजर आए। कुछ खामोशी से ही परिवार जन के साथ चादर लेकर दरगाह पहंुचे। चादरों को चूमने की होड़ भी जायरीन में लगी नजर आई। दरगाह में जायरीन की भीड़ जन्नती दरवाजे के बाहर लगी नजर आई। इस रास्ते से आस्ताना में जाने के लिए जायरीन में होड़ लगी थी। अहाता ए नूर और पांयती दरवाजा के सामने वाले दालान में भी कव्वाली की महफिल सजी थीं। यहां जायरीन की भीड़ भी लगी नजर आई।


