देवघर में महाशिवरात्रि की तैयारियां शुरू:बसंत पंचमी पर मिथिलांचल के लोग चढ़ाएंगे तिलक, अर्पित करेंगे सलामी जल, VIP दर्शन रहेगा बंद

महाशिवरात्रि से पहले द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा बैद्यनाथ धाम पूरी तरह शिवमय हो गया है। बसंत पंचमी के दिन बाबा का तिलकोत्सव होगा। इसके लिए मिथिलांचल से हजारों तिलकहरू देवघर पहुंच चुके हैं। बाबा के तिलक और सलामी जल अर्पण की सदियों पुरानी परंपरा को निभाने के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब लगातार बाबाधाम की ओर बढ़ रहा है। कांवर, पारंपरिक वेशभूषा और भक्ति भाव के साथ पहुंचे तिलकहरू बाबा को महाशिवरात्रि के विवाह का आमंत्रण देने आए हैं। बाबा नगरी में बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है। मिथिला की है बाबा बैद्यनाथ को तिलक चढ़ाने की परंपरा बसंत पंचमी पर बाबा बैद्यनाथ का तिलक करने की परंपरा मिथिला क्षेत्र में पीढ़ियों से चली आ रही है। समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी समेत मिथिलांचल के गांवों से तिलकहरू पैदल यात्रा करते हुए पहले सुल्तानगंज पहुंचते हैं। वहां से गंगाजल भरकर करीब 100 से 105 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा कर देवघर आते हैं। बाबाधाम पहुंचने पर पहले दिन बाबा को ‘पहला जल’ और दूसरे दिन ‘सलामी जल’ अर्पित किया जाता है। इसके साथ धान की बाली, आम का मंजर और शुद्ध घी चढ़ाने की भी अनोखी परंपरा है। मान्यता है कि बाबा का तिलक होते ही मिथिलांचल में होली का शुभारंभ हो जाता है। तिलक के बाद श्रद्धालु एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशियां मनाते हैं। बसंत पंचमी पर वीआईपी दर्शन पर रोक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन ने इस बार कड़े फैसले लिए हैं। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी और मंदिर प्रशासक नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देश पर बसंत पंचमी के दिन वीआईपी और आउट ऑफ टर्न दर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का कहना है कि इस दिन सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर दिया जाएगा, ताकि सामान्य कतार में खड़े भक्तों को बिना किसी भेदभाव के सुगम दर्शन मिल सके। हालांकि 600 रुपए शुल्क वाला शीघ्र दर्शनम् विकल्प सीमित संख्या में उपलब्ध रहेगा, जिससे व्यवस्था प्रभावित न हो। प्रशासन ने साफ किया है कि भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। तड़के 3:05 बजे खुलेंगे बाबा के कपाट बसंत पंचमी के दिन लाखों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए बाबा मंदिर का पट तड़के सुबह 3:05 बजे खोलने का निर्णय लिया गया है। इससे जलार्पण की प्रक्रिया सुबह से ही सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी। मंदिर परिसर, नंदन पहाड़, खुले मैदानों, स्कूल और कॉलेज परिसरों में तिलकहरुओं ने डेरा डाल लिया है। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। मानसरोवर से लेकर ओवरब्रिज तक विशेष बैरिकेडिंग, कतार प्रबंधन और कूपन व्यवस्था लागू की गई है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या भगदड़ की स्थिति न बने। भजन-कीर्तन और अबीर-गुलाल से गुलजार हुई बाबा नगरी इन दिनों देवघर पूरी तरह उत्सव के रंग में डूबा हुआ है। प्रशासनिक भवन परिसर और आसपास के इलाकों में विभिन्न जत्थों द्वारा भजन-कीर्तन हो रहा है। पारंपरिक लोकगीतों और शिव भजनों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। तिलक की रस्म पूरी होने के बाद श्रद्धालु बाबा के दरबार में अबीर-गुलाल अर्पित कर आपस में होली खेलेंगे। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल आस्था नहीं, बल्कि पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। बसंत पंचमी पर पूजा-अर्चना और तिलक के बाद तिलकहरू अपने-अपने गांवों की ओर लौटेंगे, लेकिन बाबा नगरी में आस्था और भक्ति की यह गूंज लंबे समय तक बनी रहेगी।

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