देश की वंदे भारत ट्रेनों का अब जोधपुर में मेंटेनेंस होगा। देश का पहला और सबसे अत्याधुनिक डिपो बनकर लगभग तैयार है। इसका 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। भगत की कोठी रेलवे स्टेशन के पास बन रहा यह डिपो सामान्य रेलवे वर्कशॉप से बिल्कुल अलग होगा। इसके काम में रशियन तकनीक का भी उपयोग किया गया है। दो प्रोजेक्ट में हो रहे काम की कुल लागत करीब 800 करोड़ से ज्यादा है। दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में भी बनेगा
जोधपुर डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया- रेल मंत्रालय ने वंदे भारत ट्रेनों के रख-रखाव के लिए पूरे देश में चार जगहों पर अत्याधुनिक डिपो बनाने की मंजूरी दी थी। इनमें दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई शामिल हैं, लेकिन निर्माण की गति के मामले में जोधपुर सबसे आगे है।
डीआरएम ने स्पष्ट किया कि चूंकि अन्य तीन डिपो अभी प्रक्रिया में हैं, इसलिए शुरुआत में देश भर में चलने वाली वंदे भारत ट्रेनें मेंटेनेंस के लिए जोधपुर ही आया करेंगी। जब तक बाकी डिपो तैयार नहीं हो जाते, जोधपुर ही इन प्रीमियम ट्रेनों का एक्सक्लूसिव सेंटर रहेगा। यह प्रोजेक्ट न केवल जोधपुर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार और तकनीकी कौशल को भी बढ़ावा देगा। दो फेज में पूरा होगा 800 करोड़ का प्रोजेक्ट डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि यह पहला पूरा प्रोजेक्ट लगभग 400 करोड़ रुपए का है। जबकि, दूसरा प्रोजेक्ट प्रोसेस में है। क्या है ‘टेक्नोलॉजी पार्टनर’ मॉडल? उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने बताया कि यह डिपो सामान्य रेलवे वर्कशॉप से बिल्कुल अलग है। यह ‘टेक्नोलॉजी पार्टनर’ कॉन्सेप्ट पर आधारित है। इस प्रोजेक्ट में रूस-भारत के संयुक्त उद्यम (Kinet Railway Solutions) और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) की भूमिका अहम है। यह साझेदारी सुनिश्चित करेगी कि मेंटेनेंस का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों का हो। रोबोटिक मशीनों से होगी जांच सीपीआरओ ने बताया कि यहां ‘पिट व्हील लेथ’ (Pit Wheel Lathe) और ‘ड्रॉप पिट टेबल’ (Drop Pit Table) जैसी आधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं। “3 पिट लाइन्स” और “लॉन्ग हॉल” जैसी सुविधाएं भी यहां है। उन्होंने बताया कि ‘ड्रॉप पिट टेबल’ एक ऐसी मशीन है जो ट्रेन के कोच को बिना हटाए उसके भारी-भरकम पहियों और बोगी को नीचे की ओर खोलकर मरम्मत करने में सक्षम है। वहीं, पूरा शेड सोलर पाइप्स और आधुनिक इलेक्ट्रिकल केबलिंग से लैस है, जो इसे इको-फ्रेंडली बनाता है। क्यों खास है ‘वंदे भारत स्लीपर’? सीपीआरओ शशिकिरण ने बताया- स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें मौजूदा चेयर कार (8 या 16 कोच) से लंबी (24 कोच तक) होंगी। जोधपुर डिपो में बन रही पिट लाइन की लंबाई लगभग 600 मीटर है, जो विशेष रूप से 24 कोच वाली लंबी स्लीपर ट्रेनों को संभालने के लिए डिज़ाइन की गई है।


