देश के अलग-अलग राज्यों के मंत्रियों का सम्मेलन:केंद्रीय मंत्री पाटिल बोले- पानी के लिए तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो भारत शामिल नहीं होगा, सीएम भजनलाल ने कहा- जहां पानी वहां विकास

राष्ट्रीय जल मिशन, जल शक्ति मंत्रालय की ओर से उदयपुर में आज अखिल भारतीय राज्य जल मंत्रियों का सम्मेलन शुरू हुआ। सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी ने कहा था कि तीसरा विश्व युद्ध होगा, वो पानी के लिए होगा। मैं मानता हूं कि तीसरा विश्व युद्ध अगर पानी के लिए हुआ तो भारत उसमें कहीं नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पानी का प्रबंध विश्व युद्ध के पहले देश में करेंगे। इसमें हम सबको भी योगदान देना होगा। हम बात सुनकर बैठे रहेंगे तो कुछ नहीं होगा। हम सब मिलकर संकल्प के साथ काम करेंगे तो परिणाम आएंगे। हम सफल भी होंगे और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी का संकट नहीं होगा। कोड़ियात में अनंता रिसोर्ट में हो रहे दो दिवसीय सम्मेलन में देश के जल संकट और बारिश के पानी संचय को लेकर चर्चा की जा रही है। जिन राज्यों के मॉडल अच्छे होंगे उनकी जानकारी दूसरे राज्यों को शेयर की जाएगी। देश के अलग-अलग राज्यों के 41 मंत्री, 41 सचिव और 300 अन्य इंजीनियर और अधिकारी सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। पीकेसी-ईआरसीपी से राजस्थान को मिलेगा ज्यादा पानी पाटिल बोले- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता के लिए जो मिशन शुरू किया वो आज सबके सामने है। जल जीवन मिशन शुरू किया तो लोगों के घरों में शुद्व जल दिया जा रहा है। इस पानी के कारण के कई फायदे हुए है। उन्होंने कहा- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी ने कहा था कि नदियों को जोड़ना चाहिए। उन्होंने कल्पना की थी और हमने कोशिश की। अब इस पर काम शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश और राजस्थान भी आगे बढ़े।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने बहुत सकारात्मक सहयोग दिया। पूरे देश में पानी की किल्लत वाला स्टेट है तो राजस्थान है लेकिन आने वाले समय में राम जल सेतु लिंक परियोजना (पीकेसी-ईआरसीपी) की वजह से सबसे ज्यादा पानी राजस्थान को मिलेगा, यहां 50 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा। आने वाली पीढ़ी को सही समय पर आगे बढ़कर पानी संचय पर काम करना चाहिए। पाटिल ने कहा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक देश को जल सुरक्षित राष्ट्र बनाने के विजन पर हम काम कर रहे हैं। पीएम ने स्वच्छता पर जोर दिया और 12 करोड़ शौचालय बनाए जिससे 60 करोड़ लोग लाभान्वित हुए। जल जीवन मिशन के तहत अब देश के 15 करोड़ घरों में शुद्ध पानी उपलब्ध हो रहा है। पानी की शुद्धता को जांचने के लिए 25 लाख महिलाओं को किट और प्रशिक्षण दिया गया। इसी तरह वर्षा जल संग्रहण के लिए कैच द रैन का अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत कर्म भूमि से मातृभूमि अभियान के माध्यम से प्रवासी गांवों में भू जल पुर्नभरण के लिए रिचार्ज वैल बनाने में योगदान दे रहे हैं। भजनलाल बोले- जहां पानी होगा वहां विकास होगा सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग से जल शक्ति मंत्रालय बनाकर देश की जल समस्याओं को समझा है। उन्होंने कहा कि हम नदियां, पहाड़ों और पेड़ों को पूजते है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम इनको संरक्षित भी करें। वे बोले- जहां पानी होगा वहां विकास होगा। हमें पानी के संरक्षण को लेकर रोड मेप तैयार करना होगा। यह सब पूर्ति के लिए न हो। यह 2047 की जो प्लानिंग है ठीक उसी प्रकार हमें लंबी योजनाएं बनानी होगी ताकि आने वाली पीढ़ी को जल संकट के लिए परेशान नहीं होना पड़े। राम जल सेतु लिंक परियोजना प्रदेश की जीवन रेखा सीएम ने कहा- राम जल सेतु लिंक परियोजना प्रदेश की जीवन रेखा है। इसके माध्यम से प्रदेश के 17 जिलों में 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और 3 करोड़ से ज्यादा आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि कर्मभूमि से मातृभूमि कार्यक्रम के माध्यम से प्रवासी राजस्थानी प्रदेश के 60 हजार गांवों में भूजल पुनर्भरण के लिए रिचार्ज वैल बनाने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण के लिए कम पानी में उगने वाली फसलों, शहरी जल प्रबंधन, सीवरेज के पानी के शुद्धिकरण एवं पुनः उपयोग के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, जल गुणवत्ता और स्रोतों की निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग सहित विभिन्न कदम उठा रही है। मेहमानों का राजस्थानी परपंरा से स्वागत इससे पहले आयोजित कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और आए मेहमानों का राजस्थानी कलाकारों ने अपनी परम्परा से स्वागत किया। इस दौरान नगाडे बजाए गए। इससे पहले भोपाल में हुई क्राफ्रेंस को लेकर जानकारी दी गई। ओडिशा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, हिमाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव आदि भी शामिल हुए है। इसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, जल संसाधन, जल स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, वन एवं पर्यावरण मंत्री और अधिकारी इसमें हिस्सा ले रहे है।

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