देश में माैसम विभाग की स्थापना के डेढ़ साै साल आज पूरे हाे गए। 1875 में आईएमडी ने मौसम संबंधी अवलोकन, संचार, पूर्वानुमान के लिए माैसम केन्द्र स्थापित किए, हालांकि ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के मौसम और जलवायु का अध्ययन करने के लिए पहली बार मद्रास (चेन्नई) 1793 में एक वैधशाला का निर्माण कर लिया था। देश में औपचारिक रूप से साल 1875 में भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना हुई और सभी मौसम संबंधी कार्याें के लिए एक केंद्रीय प्राधिकरण के अधीन आ गए। एच एफ ब्लेनफोर्ड काे पहला मौसम संबंधी रिपोर्टर नियुक्त किया गया। वैध-शालाओं के पहले महानिदेशक सर जॉन इलियट थे, जिन्हें मई 1889 में कोलकाता मुख्यालय में नियुक्त किया गया था। इसके बाद आईएमडी का मुख्यालय शिमला, पुणे व नई दिल्ली में स्थापित किया। नाटाणी जी के बाग में केवल बारिश और तापमान का प्रेक्षण हाेता था, अब प्रति सैकेंड हवा की रफ्तार, दिशा, नमी, वायुदाब, दृश्यता तक जांच सकते है। जयपुर में 1875 में मौसम वैधशाला नाटाणी जी का बाग में स्थापित की गई। यहां में बारिश और तापमान का प्रेक्षण किया जाता था। इसके बाद में साल 1947 में जयपुर एयरपोर्ट पर शिफ्ट किया गया। यहां अब तक अत्याधुनिक उपकरणाें से अब बारिश, तापमान प्रेक्षण के अलावा हवा की रफ्तार, वायुदाब, दृश्यता में हाेने वाले प्रति सेकेंड बदलाव का ऑब्जर्वेशन कर सकते है। माैसम केन्द्र जयपुर में सिलाेमीटर से क्लाउट हाइट तक नाप सकते है। पायलट बैलून तकनीक के बारे में बताया जाएगा मौसम विज्ञान केंद्र में आज स्कूल विद्यार्थियों, आमजन और शोधार्थियों के लिए मौसम विज्ञान एवं पूर्वानुमान से संबंधित डॉपलर वेदर राडार, सैटेलाइट, आरएस आरडब्ल्यू, पायलट बैलून तकनीक के बारे में बताया जाएगा। माैसम केन्द्र जयपुर निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि भारत में सबसे पुरानी मौसम संबंधी वैधशाला हैं। आईएमडी भारत का पहला ऐसा संगठन है, जिसके पास वैश्विक डाटा एक्सचेंज करने के लिए स्विचिंग कंप्यूटर था। निरंतर मौसम निगरानी के साथ ही विशेष रूप से चक्रवात चेतावनी के लिए उपग्रह जिओ स्टेशनरी सैटेलाइट इनसेट स्थापित किया है। मौसम एवं जलवायु विषय पर स्कूल विद्यार्थियों के लिए आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता के लिए पुरस्कार वितरण कार्यक्रम हाेगा। इसके बाद पौधारोपण कार्यक्रम भी किया जाएगा। इस माैके पर डॉ. राजेश कुमार प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं आईएमएस जयपुर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन करेंगे।


