कुंदरु 48 रुपए किलो थोक में बोली लगी तो छबिलाल धूप में सांवला हो चुका चेहरा भी दमकने लगा। छबिलाल बार-बार उस पर्ची को देख रहे हैं जिसको आढ़तिया ने दिया है। चेकदार लाल शर्ट और मटमैले पैंट में अभी भी पीली मिट्टी लगी हुई है। ऐसा लग रहा है कि बाड़ी से सब्जी तोड़कर सीधे शास्त्री मार्केट आए हैं। पूछने पर बताया, ‘भाटागांव से आए हैं। पहले तो 10-15 रुपए किलो बिकता था। आज पहली बार इतना बढ़िया भाव मिला है।’ इसी तरह कुम्हारी के थोक सब्जी मंडी में भी बाजार गरम है। दोपहर दो बजे बोली शुरू हुई। किस सब्जी की बोली कहां तक जाएगी, इसका अनुमान कोई नहीं लगा पा रहा है। धमधा से भिंडी लेकर पहुंचे रामजीलाल जांगड़े बाजार के रूख से बहुत खुश हैं। उनकी भिंडी थोक में 53 रुपए किलो बिकी। थोक भाव बहुत ज्यादा है। इसलिए खरीदने वाले से आसपास खड़े दूसरे फुटकर सब्जी विक्रेता उससे पूछ रहे हैं, ‘खरीद तो लिए, बेचोगे कैसे?’ लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी दिखाई दे रहा है- कहीं खुशी कहीं गम। फुटकर में सब्जी का भाव इतना बढ़ गया है कि आम लोग परेशान हैं। धनेश्वरी शाम को कोटा-रामनगर मार्केट में सब्जी खरीदने आई हैं। भाव पूछने पर दुकानदार बताने लगा, ‘ परवल 100 रु, भिंडी 80 रु., करेला 80 रु., खेखसी 100 रु, टमाटर 40 रु., पट्टू 250 रुपए पाव…।’ भाव सुनकर वह चौंक गईं। उल्टे दुकानदार से पूछने लगी, ‘ इतनी महंगी सब्जी कब से हो गई। पिछले हफ्ते आई थी, तब कोई भी सब्जी इतनी महंगी नहीं थी।’ दुकानदार चुप है और सब्जियों को व्यवस्थित कर रहा है। बगल में खड़ी दूसरी महिला हंसती हुई बोली, ‘ अब तो सब्जी खाना छोड़ना पड़ेगा। अब चना, मटर, आलू बड़ी, सोयाबीन ज्यादा खाना पड़ेगा।’ कुम्हारी के थोक सब्जी कारोबारी मंटू यादव भी मानते हैं कि पिछले कुछ दिनों में सब्जी का रेट बहुत बढ़ा है। अभी बरसाती सब्जियों का सीजन है। करेला, गलकी, कुंदरु, पत्तागोभी, अरबी, बैगन, भिंडी, बीन्स, लौकी, ओल, पालक आदि सब्जियां सस्ती होनी चाहिए थीं। लेकिन लगातार बारिश होने से सब्जियों की आवक घट गई है। मौसम इसी तरह रहा तो भाव और बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि परवल, टमाटर, खेखशी, शिमला मिर्च जैसी कुछ सब्जियां बाहर से आती हैं। इसलिए इनका महंगा होना समझ में आता है। बता दें कि अंडा भी पिछले एक सप्ताह में प्रति कैरेट 10 से बारह रुपए महंगा हुआ है।


