भास्कर न्यूज | कवर्धा भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना एक अजीब और चिंताजनक विरोधाभास से जूझ रहा है। खेतों में गन्ना है, लेकिन कारखाने तक नहीं पहुंच रहा। नतीजा यह कि करोड़ों की लागत से बना सहकारी कारखाना अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहा है। इसकी मार सीधे किसानों, मजदूरों और पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर पड़ रही है। कारखाना प्रबंधन ने 23 जनवरी को सदस्य किसानों से सर्वे के अनुरूप गन्ना आपूर्ति की अपील जारी की है। यह सिर्फ एक औपचारिक सूचना नहीं, बल्कि सहकारी व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है। हकीकत यह है कि पेराई सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26 तीनों वर्षों में सर्वे अनुमान के मुताबिक गन्ना नहीं आया। इसका नतीजा यह हुआ कि कारखाने की पेराई क्षमता का पूरा इस्तेमाल ही नहीं हो सका। पेराई अवधि छोटी होती गई, उत्पादन घटता गया और आर्थिक दबाव बढ़ता चला गया। उपविधि में सख्ती, लेकिन अमल में ढिलाई बरत रहे कारखाना प्रबंधन ने बताया कि उपविधि धारा 07(02)(घ) के अंतर्गत सदस्य किसानों के लिए अपना उत्पादित गन्ना कारखाने में आपूर्ति करना अनिवार्य है। वहीं उपविधि धारा 09 (क)(05) के अनुसार यदि लगातार सर्वे के अनुरूप गन्ना आपूर्ति नहीं की जाती है, तो सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान है। लेकिन किसान अमल नहीं कर रहे हैं। { भोरमदेव शक्कर कारखाना: भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना राम्हेपुर में अब तक 1,78187 मीट्रिक टन गन्ना पेराई हो चुकी है। 11.34% रिकवरी से अब तक 2,02350 क्विंटल शक्कर उत्पादन किया जा चुका है। { पंडरिया शक्कर कारखाना: बिशेसरा स्थित नए कारखाने में अब तक 1,16508 मीट्रिक टन गन्ना पेराई हो चुकी है। 11.07% रिकवरी से अब तक 1,23016 क्विंटल शक्कर उत्पादन हो चुका है।


