जोधपुर की एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने दिल्ली स्थित सफेमा कोर्ट से दो तस्करों की 35 लाख कीमत की गाड़ियां जब्त करने का ‘कन्फर्मेशन ऑर्डर’ हासिल किया है। यह कार्रवाई एनसीबी द्वारा 866 किलो गांजा बरामदगी से जुड़े तस्करों द्वारा मादक पदार्थ की खरीद-फरोख्त से अर्जित संपत्तियों को फ्रीज करने के लिए की गई। एनसीबी जोधपुर के क्षेत्रीय निदेशक घनश्याम सोनी ने बताया कि गत 23 मई 2024 को एनसीबी की टीम ने मोगड़ा-गुढ़ा विश्नोइयां रोड पर एक पिकअप से गांजा के 71 पैकेट बरामद किए थे। इसी क्रम में कार्रवाई करते हुए टीम ने गुढ़ा विश्नोइयां निवासी भागीरथ विश्नोई पुत्र छोगाराम के घर से 99 पैकेट्स गांजा पकड़ा था। इन्हीं पैकेट्स में कुल 866.600 किलो गांजा जब्त किया गया था। ऐसे शातिर तस्करों पर सख्त कार्रवाई के क्रम में मादक पदार्थ से अर्जित संपत्तियों के बारे में छानबीन की गई, ताकि वित्तीय अनुसंधान करके इन तस्करों की आर्थिक रूप से कमर जोड़ी जा सके। एनसीबी की टीम ने छानबीन में पाया कि चौखा निवासी गांजा तस्कर बलदेवसिंह गहलोत पुत्र अशोक गहलोत के पास 8 लाख रुपए कीमत की एक कार है, जबकि बोडवी खुर्द निवासी सीताराम पुत्र कचराराम के पास 27.50 लाख रुपए कीमत का अशोक लैलेंड ट्रक है। सफेमा कोर्ट में सुनवाई के बाद मिली सफलता सोनी के अनुसार तस्करों के इन वाहनों को फ्रीज करने के लिए फ्रीजिंग ऑर्डर बनाकर सफेमा (तस्कर एवं विदेशी मुद्रा छलसाधक (सम्पति आहरण)) दिल्ली को भेजा गया। जहां कई बार सुनवाई हुई। सफेमा कोर्ट से इन गाड़ियों को तस्करों द्वारा अवैध कारोबार से अर्जित मानकर इन सम्पतियों को फ्रीजिंग कन्फर्मेशन किया गया है। इन दोनों वाहनों का कुल मूल्य 35,50,000/- रूपए है| जानें…क्या है सफेमा और इससे जुड़ी प्रक्रिया सफेमा (SAFEMA), जिसका पूरा नाम “तस्कर और विदेशी मुद्रा हेरफेर (संपत्ति जब्ती) (Smugglers Foreign Exchange Fraudsters (Property Withdrawal) अधिनियम, 1976” है। यह एक ऐसा कानून है, जो तस्करों और विदेशी मुद्रा हेरफेर करने वालों की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति के पास 10 साल के अंदर खुद के या अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के नाम से अधिक संपत्ति पाई जाती है, तो कोर्ट संबंधित को नोटिस जारी कर उन संपत्तियों की जानकारी देने के लिए कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दे सकती है।


