कासाबाद इलाके में दो दिन से लापता 9 साल के बच्चे अमन का शव उसके घर से करीब 50 मीटर की दूरी पर झाड़ियों में मिला है। बच्चे की गला रेतकर हत्या की गई है। अमन 5 फरवरी दोपहर करीब 2 बजे घर के बाहर खेल रहा था, जिसके बाद वह लापता हो गया था। परिजनों ने पहले खुद बच्चे की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने थाना जोधेवाल, थाना सलेम टाबरी और थाना मेहरबान में शिकायत दी। परिजनों का आरोप है कि हदबंदी को लेकर उस समय उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। अगले दिन 6 फरवरी को थाना सलेम टाबरी में कच्ची शिकायत लिखी गई, लेकिन पुलिस से मदद न मिलने पर शनिवार दोपहर परिजनों ने बहादुर के रोड जाम कर प्रदर्शन किया। इसके बाद थाना सलेम टाबरी की पुलिस परिजनों के साथ तलाश को निकली। पिता अखिलेश ने बताया कि उन्हें अब तक समझ नहीं आई, बेटे से क्या हुआ और किसने उसकी हत्या की है। उधर, शव मिलने पर सीआईए स्टाफ, थाना सलेम टाबरी की पुलिस और एडीसीपी-1 समीर वर्मा पहुंचे। एडीसीपी-1 समीर वर्मा ने बताया, सीसीटीवी कैमरे चेक करने पर बच्चा एक व्यक्ति के पीछे झाड़ियों की ओर जाता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद झाड़ियों में सर्च किया गया तो बच्चे का शव बरामद हुआ। पुलिस को एक महिला व पुरुष की फुटेज भी मिली है, जिनकी तलाश की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा है। धरने के बाद बढ़ा दबाव तो हत्या कर शव झाड़ियों में फेंका प्रारंभिक जांच में कई अहम सुराग मिल रहे हैं। परिजनों 5 फरवरी को भी उसी जगह अमन की तलाश में गए थे, लेकिन उस समय वहां कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। पुलिस सूत्रों के अनुसार, माना जा रहा है कि हत्यारे परिजनों के धरने प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के बाद हरकत में आए और शव को वहां फेंका गया। क्योंकि जिस जगह से शव बरामद हुआ, वहां जमीन पर खून के निशान नहीं मिले हैं। केवल बच्चे के शरीर और कपड़ों पर खून पाया गया। साफ संकेत मिल रहे हैं कि हत्या किसी दूसरी जगह की गई और बाद में शव को झाड़ियों में लाकर फेंका गया। एक और अहम पहलू यह है कि बच्चे के शव से न तो बदबू आ रही थी और न ही शरीर सड़ा हुआ या काला पड़ा था। मर्डर साइट से मिले सुरागों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि हत्या शव मिलने से कुछ घंटे पहले ही की गई हो सकती है। अपहरण के बाद हत्या की साजिश का एंगल होन से पुलिस इनकार नहीं कर रही। डॉक्टर राजेश, रिटायर्ड फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट मौत के बाद शरीर डी-कंपोज होना शुरू हो जाता है। आमतौर पर मौत के 6 से 12 घंटे के भीतर शरीर ठंडा पड़ने लगता है और अकड़न की स्थिति बनने लगती है। 12 से 24 घंटे में शरीर में गैस बनने लगती है और हल्की दुर्गंध महसूस होने लगती है। 24 से 48 घंटे में शव गलने लगता है। शव सूजने लगता है और दुर्गन्ध बढ़ जाती है। त्वचा का रंग भी 24 घंटे बाद नीला-काला या हरा पड़ने लगता है, जिसे पोस्टमार्टम स्टेनिंग और डिके कलर चेंज कहा जाता है। यह पूरी प्रक्रिया मौसम और जगह पर निर्भर करती है। गर्मी के मौसम में शव जल्दी सड़ता है और 24 घंटे में ही तेज दुर्गंध आने लगती है। सर्दी के मौसम में यही प्रक्रिया 2 दिन तक होता है। खेतों या झाड़ियों में पड़ा शव वातावरण के संपर्क में रहता है, जिससे हवा, नमी और कीड़ों के कारण सड़न की प्रक्रिया तेज हो सकती है। हालांकि, फरवरी में पारा कम होने से यह प्रक्रिया धीमी रहती है।


