मानसून सीजन में हुई अतिवृष्टि से जिले में खरीफ फसलों में हुए खराबे के आंकलन को लेकर दो विभागों की प्रारंभिक रिपोर्ट में बड़ा अंतर सामने आया है। राजस्व विभाग ने 6 तहसीलों के 343 गांवों में खराब तो माना है, लेकिन 29 गांवों को छोड़ दें तो कहीं पर भी यह 30 फीसदी से ज्यादा नहीं है। वहीं कृषि विभाग ने पूरे जिले में 53 फीसदी खराबा माना है। चिड़ावा क्षेत्र के सूरजगढ़ व पिलानी में कपास में 54.41% नुकसान माना है। वहीं राजस्व विभाग ने इस क्षेत्र में चवला की फसल में अधिकतम 35 फीसदी नुकसान माना है। भास्कर ने क्षेत्र के किसानों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि नुकसान 80 फीसदी से ज्यादा हुआ है। सरकार मुआवजा नहीं देना चाहती, इसलिए नुकसान कम आंका जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार जिले में अतिवृष्टि से सर्वाधिक नुकसान सूरजगढ़ क्षेत्र के किसानों को हुआ है। यहां राजस्व विभाग ने चवला, मूंग, बाजरा, ग्वार, मूंगफली व कपास में 30 से 35% नुकसान माना है। वहीं कृषि विभाग ने इस क्षेत्र में कपास में 56% और मूंग व चवला में 100% नुकसान माना है। राजस्व विभाग : सूरजगढ़ के 29 गांवों में 30 से 35 प्रतिशत तक नुकसान माना : राजस्व विभाग ने जिले की छह तहसीलों के 343 गांवों में नुकसान माना है। इसमें सबसे ज्यादा 303 गांवों में चवला की फसल में 5 से 35 प्रतिशत तक नुकसान माना जा रहा है। 150 गांवों में मूंग, 113 गांवों में कपास, 62 गांवों में ग्वार तथा 26 गांवों में मूंगफली में 5 से 35 फीसदी नुकसान माना है। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक रिपोर्ट में सूरजगढ़ के 29 गांवों में चवला, मूंग, कपास, बाजरा, ग्वार व मूंगफली में 35 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। कृषि विभाग : कपास में सर्वाधिक 54 व मूंग में 42 प्रतिशत नुकसान माना : कृषि विभाग ने जिले में बोई गई 53% फसल में नुकसान माना है। यानी जिले में बोई गई 319635 हैक्टेयर में से 35913 हैक्टेयर में 33 से 50 तथा 11750 हैक्टेयर में 50 से 75 प्रतिशत तक खराबा हुआ है । जिले में सर्वाधिक 54% नुकसान कपास में माना गया है। इसी तरह मूंग में 42 व चवला में 32 फीसदी खराबा माना है। चिड़ावा क्षेत्र में मूंग व चवला में 50 से 75% नुकसान हुआ है। बाजरा, कपास में 33 से 50% नुकसान माना है। किसान बोले : 80% से ज्यादा खराबा, एक बीघा में केवल आधा क्विंटल ही कपास होगा सूरजगढ़ क्षेत्र के किसानों का दावा है कि अतिवृष्टि से कपास, चवला व मूंग में 80 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हुआ है। क्षेत्र में एक बीघा में चार क्विंटल कपास होता है, लेकिन बरसात के कारण इस बार 50 किलो ही उत्पादन होने की संभावना है। रघुनाथपुरा के बलवान ने बताया कि क्षेत्र में चवला, कपास, मूंग, बाजरा व ग्वार में सबसे ज्यादा 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। कपास के तेदूआ का कलर बदल जाने से कपास में दागी हो गया है। जीणी निवासी हरीश सैन का कहना है कि बरसात से कपास के फूल झड़ गए। चवला के दाने दागी हो गए। बरसात में भीगने से मूंग का दाना कमजोर हुआ है। हरिपुरा के रतन ने बताया कि फसल नष्ट होने के बाद उस पर ट्रैक्टर चलवाना पड़ा। रिपोर्ट खराबे का सही आंकलन करने के लिए ग्राम स्तर पर एक समिति का गठन किया जाना चाहिए, जिसमें राजस्व विभाग, कृषि विभाग, सरपंच व ग्रामीणों को शामिल किया जाए। अतिवृष्टि से जिले में सबसे ज्यादा नुकसान चवला फसल में हुआ है। चवला की फली का कवर नरम होता है। बरसात से फली तो टूटी ही है, उसके बाद नमी रहने से दानें में फंगस रोग भी लग गया। इससे दाने का रंग व वजन बदल गया। मूंग में पानी लगने से दाना काला पड़ जाता है। जिले में देर से बोए गए बाजरे में भी गोंदिया रोग लग गया है। लेकिन इसे नुकसान की श्रेणी में नहीं लिया। 33 प्रतिशत से अधिक खराबे पर मिलता है मुआवजा : आपदा प्रबंधन सहायता विभाग द्वारा फसल खराबे पर मुआवजा दिया जाता है। इसके तहत 33 प्रतिशत से अधिक खराबा होने पर असिंचित क्षेत्र में प्रति हैक्टेयर 8500 रुपए, सिंचित क्षेत्र में प्रति हैक्टेयर 17000 रुपए तथा बहुवर्षीय फसलों में खराबा होने पर 22500 रुपए मुआवजे का प्रावधान है। डॉ. हनुमान प्रसाद, कृषि वैज्ञानिक अतिवृष्टि से सबसे ज्यादा खराबे वाले 343 गांवों में से 80 गांव मलसीसर तहसील के हैं। जहां 5 से 10 फीसदी तक मूंग व चवला में खराबा माना गया है। सूरजगढ़ के 77 गांवों में चवला, मूंग, कपास, बाजरा, ग्वार व मूंगफली की फसल में, पिलानी के 51 गांवों में चवला, मूंग व कपास फसल में, मंडावा के 61 गांवों में चवला में, बिसाऊ के 46 गांवों में चवला फसल में तथा उदयपुरवाटी के 28 गांवों में मूंग में खराबा माना है। उधर, कृषि विभाग की सहायक निदेशक सविता ने बताया कि अतिवृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान चवला में हुआ है। मूंग, कपास व बाजरा की फसल में भी खराबा है। चवला व मूंग की फलियां टूट गई। बाजरे में गोंद लग गया। खराबा गांव 5-10% 20710-20% 4120-30% 6630-35% 29 “राजस्व विभाग ने अभी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है। अभी फाइनल रिपोर्ट तैयार हो रही है। जिले में 15 अक्टूबर तक गिरदावरी की जाती है, लेकिन किसानों ने फसल काटना शुरू कर दिया है। इसलिए इस बार 30 सितंबर तक गिरदावरी करने के निर्देश दिए हैं। फाइनल रिपोर्ट के आधार पर ही किसानों का मुआवजा तय होगा।” – सुप्रिया कालेर, प्रभारी अधिकारी, गिरदावरी


