सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जल्द सस्ती दवा की सहूलियत मिलेगी। यहां पर 7 साल से बंद पड़ा जन औषधि केंद्र एक बार फिर खुलने जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने एक कमेटी का गठन किया है, जो केंद्र के बंद ताला तोड़ेगी। हालांकि रोगी कल्याण समिति की मीटिंग में भी जन आैषधि केंद्र का मुद्दा उठा था। उसके बाद प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सिविल अस्पताल में रेडक्रॉस ने साल 2017 से मेडिकल स्टोर बंद कर दिया था। साल 2024 में सिविल अस्पताल में जन औषधि केंद्र खोलने की मंजूरी मिली। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने केंद्र खोलने की प्रक्रिया शुरू की तो विधायक रमन अरोड़ा के जानकार ने दुकान की मेंटेनेंस और पेंटिंग कराई। जबकि दुकान अलॉट नहीं हो सकी। इस पर दुकान को लेकर विवाद हो गया और ताला लगा रहा। हाल ही में हुई रोगी कल्याण समिति की मीटिंग में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। समिति के सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि केंद्र के बंद होने से मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों को आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से इस केंद्र को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया। इससे सिविल अस्पताल में मरीजों को सस्ती दरों पर दवाइयां मिलेगी। जिक्रयोग है कि सरकारी संपत्ति को कोई ताला नहीं लगा सकता है। इसलिए मीटिंग में ताला खोलने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने कमेटी का गठन भी कर दिया है, जो बंद ताले को खोलेगी। पारदर्शिता के लिए की जाएगी वीडियोग्राफी अस्पताल प्रशासन ने ताला तोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं। कमेटी की मौजूदगी में ताला तोड़ा जाएगा, तो वीडियोग्राफी कराई जाएगी। फिर प्रशासन नए सिरे से केंद्र के अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू करेगा। इस संबंध में एमएस डॉ. नमिता घई ने कहा कि मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध करवाने के लिए जन आैषधि केंद्र शुरू किया जा रहा है। ताला तोड़ने के लिए कमेटी गठित की गई है।


