द विंची रोबोट 4.0:दिल्ली-मुंबई नहीं, भोपाल में करेगा हाईटेक सर्जरी

राजधानी भोपाल के एम्स में अब दुनिया की सबसे उन्नत हाई एंड रोबोटिक सर्जरी प्रणाली ‘द विंची रोबोट 4.0’ इंस्टॉल हो रहा है। इस सिस्टम के लगने के बाद एम्स भोपाल सेंट्रल इंडिया का पहला सरकारी मेडिकल संस्थान होगा, जहां इतनी अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन हो सकेंगे। करीब 30 करोड़ की लागत से लग रहा यह सिस्टम फिलहाल यूरोलॉजी विभाग में उपयोग होगा, जहां प्रोस्टेट कैंसर, किडनी ट्यूमर, मूत्राशय कैंसर जैसे जटिल ऑपरेशन किए जाएंगे। धीरे-धीरे इसे कार्डियक, गैस्ट्रो, जनरल सर्जरी, गायनी और अन्य विभागों में भी लागू किया जाएगा। एम्स में हर महीने 1,000 से ज्यादा सर्जरी होती हैं, जिनमें कम से कम 40% मरीजों को इस तकनीक से सीधा फायदा मिल सकेगा। इस प्रणाली में चार रोबोटिक आर्म और दो कंसोल शामिल होंगे। डॉक्टर बैठकर एक कंसोल से पूरे रोबोट को ऑपरेट करेंगे। रोबोटिक आर्म इंसान के हाथों की तुलना में कई गुना ज्यादा सटीकता और नियंत्रण प्रदान करता है। इंस्ट्रक्टर ने डेमो में बताया कि इस तकनीक से रियल-टाइम टेली-ऑपरेशन हो सकते हैं। एक सर्जन अमेरिका में बैठकर फ्रांस में भर्ती मरीज का ऑपरेशन कर चुका है। द विंची रोबोट 4.0 क्यों खास? इससे क्या फायदे होंगे: कम रक्तस्राव, संक्रमण का कम खतरा, कम दर्द, अस्पताल में रुकने की अवधि कम, तेजी से रिकवरी। सामान्य आंखों से 10 गुना देखने की क्षमता एम्स के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. केतन मेहरा का कहना है कि सिस्टम पूरी तरह चालू होने में 4 महीने लगेंगे। इसके लिए 23 सर्जनों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि इसे अधिक विभागों में उपयोग किया जा सके। एम्स के कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ. विक्रम वट्टी बताते हैं कि इस कैमरे की विजन क्षमता सामान्य आंखों से 10 गुना अधिक है। इससे शरीर के बेहद सूक्ष्म हिस्से साफ नजर आते हैं। पारंपरिक ऑपरेशन में बड़े चीरे लगते हैं और रिकवरी में समय लगता है। इस रोबोटिक सर्जरी में कट बहुत छोटा होता है। अभी इस तकनीक के लिए मरीजों को मुंबई, दिल्ली या चेन्नई जाना पड़ता था और खर्च लाखों में आता था। एम्स में यह सुविधा सरकारी दरों पर होंगी, जिससे आम मरीज भी हाई टेक ट्रीटमेंट ले सकेंगे। ये सिर्फ मशीन नहीं, भविष्य का ऑपरेशन थिएटर है
सरकारी संस्थानों में रोबोटिक तकनीक को अपनाना मरीजों के लिए गेमचेंजर साबित होगा। यह सिर्फ मशीन दिखाने के लिए नहीं, बल्कि आने वाले डॉक्टरों को भविष्य की सर्जरी के लिए तैयार करने की दिशा है। -प्रो. डॉ. मधबानंद कर, एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर एम्स भोपाल

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