धनबाद के जालान अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत:परिजनों ने इलाज में लापरवाही और अवैध वसूली का लगाया आरोप, किया हंगामा

धनबाद के एशियन जालान अस्पताल में एक गर्भवती महिला की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही और अवैध वसूली का आरोप लगाया है। सरायढेला निवासी नारायण निषाद की पत्नी किरण देवी को लगभग एक सप्ताह पहले प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। शनिवार को बच्चे के जन्म से पहले ही उनकी मौत हो गई। डॉक्टर 36 घंटे तक स्थिति को टालते रहे: परिजन मृतका के भाई सुशील निषाद ने बताया कि उनकी बहन पिछले सात दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं। डॉक्टरों ने पहले ऑपरेशन की सलाह दी थी, लेकिन बाद में पेट सुन्न होने का हवाला देते हुए सामान्य प्रसव का प्रयास करने की बात कही। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर 36 घंटे तक स्थिति को टालते रहे। शनिवार को जब डिस्चार्ज के कागजात तैयार किए जा रहे थे, तभी अचानक मरीज की हालत बिगड़ने की बात कहकर उसे आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया। परिजनों ने डॉक्टरों से बाहर के किसी वरिष्ठ चिकित्सक को बुलाने का अनुरोध किया था और उसका खर्च स्वयं वहन करने की पेशकश की थी। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने स्वयं इलाज करने का दावा किया, जिसके बाद महिला की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि मरीज की नाजुक स्थिति के बावजूद प्रबंधन की ओर से 50 हजार रुपए जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था। गरीब मरीजों से पैसे के लिए दबाव बनाना अनुचित: पूर्व मेयर वहीं, घटना की सूचना मिलने पर पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि किरण देवी को एक गंभीर मामले के रूप में भर्ती कराया गया था, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों को बचाया जा सके। उन्होंने अस्पताल की प्रबंधन व्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्थान चैरिटी के लिए स्थापित किया गया था, लेकिन यहां गरीब मरीजों से पैसे के लिए दबाव बनाना अनुचित है। उन्होंने मामले की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रबंधन से बात करने का आश्वासन दिया। पैसे का दबाव बनाने का आरोप बेबुनियाद: डॉ. राजन इधर, एशियन जालान अस्पताल के डॉ. राजन ने बताया कि मरीज पहले से ही डिप्रेशन में थी। गायनकोलोजिस्ट, न्यूरो के चिकित्सक भी लगातार मरीज की स्थिति पर निगरानी रख रहे थे। महिला के पेट में पल रहे बच्चे की मौत पहले ही हो चुकी है थी। मरीज को काफी गंभीर स्थिति में यहां भर्ती किया गया था। पैसे का दबाव बनाने का आरोप बेबुनियाद है। परिजन को अस्पताल प्रबंधन ने 90 हजार रु का डिस्काउंट भी दिया है।

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