धनबाद में मानसिक रूप से बीमार दिलीप महतो नाम के युवक ने अपनी मां और मौसी की ईंट मार कर हत्या कर दी। हत्या की यह घटना बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के कुलबेड़ा पंचायत के हड़ियाडीह गांव की है। मानसिक रूप से बीमार इस युवक के हमले में तीन लोग घायल हुए थे। जिसमें मां अलकाही देवी, मौसी सुगा देवी और बेटी खुशी शामिल हैं। हालांकि खुशी को मामूली चोटें आईं। हमले की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों को इलाज के लिए एसएनएमएमसीएच भेज दिया। इलाज के दौरान मां-मौसी की मौत हो गई। वहीं प्राथमिक उपचार के बाद खुशी को ग्रामीण उसे अपने साथ ले गए। पुलिस ने दिलीप को गिरफ्तार कर लिया है। युवक ने कहा- मुझे मच्छर समझने का अंजाम देखो घटना के बाद लोगों ने मानसिक रूप से बीमार दिलीप महतो को पकड़ कर घर के पास ही पेड़ से बांध दिया। इसके बाद पूछताछ की। वहीं मौके पर पहुंची पुलिस को दिए बयान में आरोपी युवक ने कहा कि घर में उसकी कोई वैल्यू नहीं थी। लोग उसे मच्छर समझते थे। उसने दिखा दिया कि वह भी कोई चीज है। कैसे घटी पूरी घटना आरोपी युवक के पिता कांशीनाथ महतो ने बताया कि घटना के वक्त वह और उनका छोटा बेटा घर पर नहीं थे। जब हमें सूचना मिली को मौके पर पहुंचे। देखा कि ईंट से मार कर अधमरा कर दिया है। उसने बताया कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। तीन बार इलाज भी कराया। पिछले महीने भी 11 तारीख को इलाज के लिए ले गए, पर वहां इसका डॉक्यूमेंट नहीं मिला तो भर्ती नहीं लिया जा सका। वहीं आरोपी दिलीप महतो के जीजा चूरामन महतो ने बताया कि घटना के समय सास अलकाही देवी खाना खा रही थी, जबकि मौसी सास सब्जी बना रही थी। इस दौरान दिलीप पहुंचा और ईंट से पहले मौसी और फिर बचाने आई मां पर हमला कर दिया। बीच-बचाव के दौरान बेटी खुशी कुमारी को भी मार कर घायल कर दिया। पत्नी की मौत पर मिली थी 7 साल की सजा 5 साल पहले दिलीप की पत्नी ने जहर खा लिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई। आरोप लगा कि दिलीप की प्रताड़ना की वजह से उसने जहर खाया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। न्यायालय ने उसे 7 साल की सजा सुनाई थी। चार साल तक वह जेल में था। हाल ही वह जमानत पर जेल से बाहर आया था। परिजन उसका इलाज कराने के लिए कांके ले गए थे। घर में आग भी लगा चुका है आरोपी ग्रामीणों ने बताया कि पिछले महीने दिलीप के घर में सूर्याही पूजा थी। पूजा के दिन ही दिलीप ने घर में आग लगा दी थी। त्योहार के समय घर में लोग थे। लोगों ने सूझ-बूझ से तुरंत आग पर काबू पा लिया था। इस कारण बड़ी घटना टल गई थी।


