धनूरी टोल पर पुलिस का बल-प्रयोग:ग्रामीणों को खदेड़ा, फिर शुरू हुआ धरना, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, कुछ देर बाद किया रिहा

झुंझुनूं-राजगढ़ स्टेट हाइवे पर स्थित धनूरी टोल प्लाजा जंग का मैदान बन गया। अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने शाम के समय अचानक बल-प्रयोग कर उन्हें धरना स्थल से खदेड़ दिया। इस कार्रवाई के दौरान अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और पुलिस करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को जबरन उठाकर थाने ले गई। हालांकि, प्रशासन के इस कड़े रुख के बावजूद ग्रामीणों के हौसले पस्त नहीं हुए और रिहाई के बाद देर रात दोबारा टोल पर धरना शुरू कर दिया गया। शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने का आरोप संघर्ष समिति ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर थे। पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के धरना स्थल पर धावा बोल दिया। संघर्ष समिति के अनुसार, “प्रशासन संवाद करने की बजाय आमजन की आवाज को लाठी और बल के दम पर कुचलना चाहता है।” पुलिस कार्रवाई के दौरान किसान नेता अरविंद गढ़वाल, महिपाल पूनिया, अजीत सिंह और शाहिद खान सहित करीब 13-15 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें जन दबाव के बाद देर शाम रिहा करना पड़ा। ग्रामीणों का विरोध मुख्य रूप से टोल प्लाजा की स्थापना और इसके संचालन के नियमों को लेकर है। प्रदर्शनकारियों की मांगें हैं। नियम विरुद्ध दूरी: ग्रामीणों का दावा है कि दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम 60 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए, जबकि लांबोर बड़ी और धनूरी टोल के बीच की दूरी मात्र 43 किलोमीटर है। 20 किमी परिधि टोल फ्री हो: टोल के 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी गांवों के वाहनों को पूर्णतः टोल मुक्त किया जाए। अधूरा वादा (वृक्षारोपण): ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के समय 16,700 पौधे लगाने का वादा किया गया था, जो आज तक कागजों तक ही सीमित है।
टोल करवाया बंद पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई के बाद ग्रामीण एक बार फिर एकजुट हुए। देर रात भारी संख्या में लोग धनूरी टोल पर जमा हो गए और विरोध स्वरूप टोल बूथ को बंद करवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना और आंदोलन जारी रहेगा। इन को लिया गया था हिरासत में पुलिस कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए प्रमुख नामों में किसान नेता अरविन्द गढ़वाल, महिपाल पूनिया, अजीत सिंह, शाहिद खान, देवकीनंदन बसेरा, तौफीक चैनपुरा, सुरेन्द्र सिलाईच, जगमाल, शीशराम सरावग, पंकज गुर्जर, अनीश धायल, मंजूर खान, रमेश राहड़, राजू फौजी और अमित शेखावत शामिल थे।

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