अमृतसर | जोड़ा फाटक चौधरी हरिसिंह नगर के जंज घर में चल रही श्री शिव महापुराण की कथा 7वें दिन में पहुंची। नंदगांव से पधारे स्वामी बृज भूषण महाराज ने कथा दौरान कहा कि धन कमाना और उसे सही जगह लगाना ही सच्चे भक्त की पहचान है। सोच-समझकर दान देना चाहिए ताकि उसका सदुपयोग हो। अगर कोई अच्छे कार्य में सहयोग नहीं करता तो उसमें बाधा भी नहीं डालनी चाहिए। कर्म का फल परमात्मा को भी भोगना पड़ता है, इसलिए सोच-समझकर कर्म करना चाहिए। भगवान ने गीता में भी कर्मों के ही बारे में बताया है। कर्म की गति बड़ी गहन है। इसका अर्थ है कि कर्म गति को जाना नहीं जा सकता। इसका अर्थ यह है कि कर्म की गति तो मनुष्य को अवश्य भोगनी पड़ती है। शास्त्र कहते हैं कि करोड़ों वर्षों के बाद भी कर्म की गति को कोई मिटा नहीं सकता। इस मौके पर प्रधान अजय गोइनका, कुलजीत सिंह, आरके मेहता, दीपक कुमार, पवन कुमार, पं. अनिल शर्मा सहित कई शिव भक्त मौजूद थे।


