धन-दौलत और ऐश्वर्य चाहिए तो करें महादेव की भक्ति

श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज ने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए कहा कि भगवान के द्वार पर किसी के साथ पक्षपात नहीं होता। भगवान के घर चाहे अमीर जाए या गरीब, सभी एक समान हैं । भगवान के द्वार सभी के लिए खुले हैं। शिव महिमा पर चर्चा करते हुए महाराज जी ने महादेव की कृपा जिस पर हो उसके घर खुशियों के खजाने भरे रहते हैं। उसे किसी वस्तु की कमी नहीं रहती। अगर मनुष्य को धन-दौलत व सुख-स्मृद्धि चाहिए तो महादेव की भक्ति करें और उन्हें प्रसन्न करें। महादेव शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्त पर कृपा का सागर लुटाते हैं। महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज ने यह विचार श्री राम भवन में आयोजित सप्त दिवसीय सत्संग अमृतवर्षा कार्यक्रम के छटे दिन श्रद्धालुओं के विशाल जनसमूह के समक्ष व्यक्त किए। जीवन-मृत्यु पर चर्चा करते हुए महाराज जी ने कहा कि इस दुनिया में जो भी आया है वो खाली हाथ आया था और खाली हाथ ही वापिस जाएगा। चाहे अमीर हो या गरीब, जो भी उसके पास है यही रह जाएगा। इसलिए भगवान ने जो दिया है उसी से संतुष्ट रहो। किसी से ईष्र्या की भावना न रखो। ईष्र्या की अग्नि मनुष्य को कभी शांति व चैन से नहीं बैठने देती। महाराज जी ने कहा कि परमात्मा ने जिसके भाग्य में जितना लिखा है, उसे उतना ही मिलेगा। भाग्य से ज्यादा किसी को नहीं मिलेगा। भाग्य में जो वस्तु लिखी है उसे मिलना ही है, चाहे उस वस्तु को पाने का प्रयत्न करो या न करो वो मिल ही जाएगी। महाराज जी ने कहा कि अगर कर्म में नहीं है तो सामने भगवान भी दोनों हाथ लुटाए खजाना देने को खड़े हों, व्यक्ति को कुछ भी नहीं प्राप्त होता । अगर कर्म में लिखा है तो सुदामा की तरह भगवान भाग्य बदल देते हैं। महाराज जी ने श्रद्धालुओं को भजन-सिमरन करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि दु:खी वह नहीं जिसके पास धन-दौलत नहीं है बल्कि दुखी तो वह है जिस व्यक्ति के जीवन में भजन-सिमरन नहीं है। अगर आपके पास खूब धन-दौलत है तो भी आप भगवान की भक्ति के लिए समय निकाल रहे हैं तो आपके जैसा सुखी व्यक्ति जीवन में कोई नहीं। महाराज ने कहा कि भगवान कण-कण में भगवान हैं। महाराज जी ने श्रद्धालुओं को श्रीमन नारायण, नारायण-नारायण, भज मन नारायण-नारायण-नारायण …,अमीर चले आए, गरीब चले आए, राम तेरे दर पे फकीर चले आए…,यहां-वहां जहां-तहां, मत पूछो कहां-कहां है संतोषी माँ…भजन सुनाकर सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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