छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गंगरेल बांध में शिकार के प्रयास में एक तेंदुए की डूबने से मौत हो गई। वन विभाग को तेंदुए का शव बांध के तट से करीब 200 मीटर की दूरी पर मिला। तेंदुआ डेढ़ साल का था। वन विभाग की टीम ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान बांध के किनारे स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। तेंदुए के शव को बाहर निकालने के बाद सोरिद में पोस्टमार्टम किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने संभावना जताई है कि शिकार के प्रयास में तेंदुआ गंगरेल बांध में काफी अंदर तक चला, जिससे उसकी डूबने से मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद विभागीय नियमों के अनुसार तेंदुए के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। गंगरेल बांध में दिखा तेंदुए का शव दरअसल, गंगरेल बांध में बोटिंग करने आए कुछ लोगों ने तेंदुए के शव को तैरते हुए देखा, जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचकर वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। गंगरेल बांध में मछलियां भी पाई जाती हैं, और गर्मी के दिनों में पक्षी पानी पीने के लिए बांध के तट पर आते हैं। बताया गया कि तेंदुआ डेढ़ साल का था, और पानी पीने के लिए बांध के तट पर आया था। शिकार करने के लिए पानी में घुसा, लेकिन गहरे पानी में जाने के कारण बाहर नहीं निकल पाया, जिससे उसकी मौत हो गई। वनमंडलाधिकारी कृष्ण जाधव ने बताया कि गंगरेल बांध के जलाशय में बोटिंग करने वाले लोगों से सूचना मिली थी कि एक तेंदुआ मृत अवस्था में पानी में है। तत्काल टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को बाहर निकाल लिया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। पोस्टमार्टम के बाद उसकी मौत का कारण ड्राउनिंग (हद से ज्यादा गहरे पानी में जाना) बताया गया है। 200 मीटर दूर जाने के बाद वापस नहीं लौटा तेंदुआ हालांकि, तेंदुए को तैरना आता है, लेकिन गंगरेल बांध के तट से करीब 200 मीटर दूर जाने के कारण वह वापस नहीं आ सका, जिससे उसकी मौत हो गई। धमतरी जिले के गंगरेल बांध के आसपास तेंदुए के मूवमेंट की खबरें समय-समय पर आती रहती हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में डर का माहौल बना रहता है। ……………………………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें चीफ जस्टिस बोले- जंगल और वन्यजीव सुरक्षित नहीं:छत्तीसगढ़ में बाघ की मौत पर जताई नाराजगी, PCCF से शपथ-पत्र पर मांगा जवाब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने बाघ की मौत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि, वन्य जीव नष्ट हो रहे हैं, पर्यावरण भी नष्ट हो रहे हैं। अब बचा क्या? वन्य जीव नहीं बचा पाएंगे, जंगल नहीं बचेगा तो कैसे चलेगा। छत्तीसगढ़ में कम से कम यही सब है। पढ़ें पूरी खबर…


