भास्कर न्यूज | राजनांदगांव राजा भानपुरी में संत उपराम साहब की स्मृति में करीब आश्रम में सत्संग समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप कबीर वाणी के राष्ट्रीय प्रचारक संत प्रभाकर साहेब ने धरती को स्वर्ग बनाने के उपाय बताया। अपने प्रवचन में संत प्रभाकर साहेब ने कहा कि स्वर्ग की ऐसी कल्पना की गई है, जहां हर कोई जाना और उसे पाना चाहता है। लोग इसके लिए कई तरह के युक्ति उपाय करते हैं। लेकिन उन्हें स्वर्ग मरने के बाद ही नसीब होता। संत कबीर ने आकाश पाताल में भटकने के बजाय धरती को स्वर्ग बनाने का मार्ग बताया। स्वर्ग में जाना नहीं उसे जानना है, इसके लिए जाति-पाती, वर्ग भेद, ऊंच-नीच की भावना से ऊपर उठकर आत्म भाव जगाना होगा। प्रभाकर साहेब ने कहा कि कबीर के विचारों में विवेक की प्रधानता और सत्य की सुगंध है, इसलिए वो सबके लिए अनुकरणीय है। देश की वर्तमान परिस्थितियों में कबीर के विचार सर्वाधिक प्रासंगिक है। झगड़े की वजह मन की उथल-पुथल को बताया संत साहेब ने कहा कि घर के झगड़े को समाप्त करके ही देश में अमन चैन कायम किया जा सकता है। झगड़े की जड़ अपने मन की उथल-पुथल है। पांच इंद्रियों का गुलाम होने पर व्यक्ति भोग पदार्थों के लिए व्याकुल होता है। स्वयं दुखी होता तथा दूसरों को सताता है। संत साहेब ने कहा कथनी करनी की एकरूपता से ही संत की सिद्धि है। झूठे आडम्बर व चमत्कार ज्यादा नहीं चल पाते जो दूसरों को बचाने का दावा करते हैं एक दिन खुद बचने के लिए जगह खोजने लगते हैं।


