अकबरपुर क्षेत्र के धर्मपुरा गांव की राजकीय विद्यालय भवन को जर्जर बताकर ध्वस्त करने के बाद स्कूल को अकबरपुर कस्बे में स्थानांतरित करने के निर्णय को लेकर ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक है। सरपंच प्रतिनिधि महेश पटेल व ग्रामीणों ने बताया कि धर्मपुरा गांव से अकबरपुर कस्बे की दूरी लगभग पांच किलोमीटर है, जिसे छोटे बच्चों के लिए प्रतिदिन तय करना बेहद मुश्किल है। स्कूल तक पहुंचने का रास्ता अलवर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर गुजरता है, जहां दिनभर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना उनके जीवन के लिए खतरे से कम नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि अकबरपुर स्थित स्कूल जाने के लिए बच्चों को खेतों की पगडंडियों से होते हुए हाईवे पार करना पड़ेगा, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। जबकि धर्मपुरा गांव में ही कक्षा एक से आठवीं तक के संचालन के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसको लेकर दर्जनों ग्रामीणों ने एकजुट होकर धर्मपुरा स्कूल को अकबरपुर शिफ्ट किए जाने का धर्मपुरा गांव में विरोध किया। इसके बाद ग्रामीण व अभिभावक अकबरपुर स्कूल पहुंचे और वहां भी विरोध जताया ग्रामीणों ने कहा कि शिक्षा विभाग ने बिना मौके का जायजा लिए ही स्कूल स्थानांतरण का निर्णय ले लिया।


