तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु 14वें दलाई लामा की ताजपोशी के 86 वर्ष पूरे होने पर कांगड़ा जिले के धर्मशाला में विशेष धार्मिक आयोजन किया जाएगा। बता दे कि यह आयोजन 23 फरवरी को मैक्लोडगंज स्थित मुख्य तिब्बती मंदिर चुगलाखंग में होगा, जिसमें दलाई लामा स्वयं उपस्थित रहेंगे। बता दे कि इस अवसर पर उनकी दीर्घायु के लिए विशेष ‘दीर्घायु पूजा’ (लॉन्ग लाइफ ऑफरिंग सेरेमनी) का आयोजन किया जाएगा। दीर्घायु प्रार्थना का आयोजन इस दीर्घायु प्रार्थना का आयोजन विश्वभर के पूर्व तिब्बती राजनीतिक कैदियों और ल्हासा बॉयज एसोसिएशन स्विट्जरलैंड द्वारा किया जा रहा है। यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी मेजबानी वे तिब्बती कर रहे हैं, जिन्होंने तिब्बत की आजादी और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए वर्षों तक जेलों में यातनाएं झेली हैं। 23 फरवरी को धर्मशाला में आयोजन बता दे कि दलाई लामा का राज्याभिषेक 22 फरवरी 1940 को तिब्बत के ल्हासा स्थित पोटाला पैलेस में हुआ था। हालांकि ऐतिहासिक तारीख 22 फरवरी है, मुख्य आयोजन 23 फरवरी को धर्मशाला में रखा गया है। दलाई लामा हाल ही में दक्षिण भारत की यात्रा पर थे, और यह उनके लौटने के बाद पहला बड़ा सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम होगा। बड़ी संख्या में लोग लेंगे भाग तिब्बती प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, इस दीर्घायु पूजा में सैकड़ों भिक्षु, भिक्षुणियां, तिब्बती समुदाय के लोग और विभिन्न देशों से आए अनुयायी भाग लेंगे। पूजा के दौरान पारंपरिक प्रार्थनाएं, मंत्रोच्चार और सांस्कृतिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। नोबेल शांति पुरस्कार किया गया था सम्मानित परम पावन दलाई लामा को करुणा, अहिंसा और विश्व शांति के संदेश के लिए जाना जाता है। उन्हें वर्ष 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। धर्मशाला स्थित उनका निवास और मुख्यालय दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र है। आयोजकों ने बताया कि यह समारोह केवल परम पावन की दीर्घायु की कामना के लिए ही नहीं है, बल्कि यह तिब्बती संघर्ष, संस्कृति और पहचान को जीवंत रखने का भी प्रतीक है।


